रायबरेली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना… 6000 रुपये के मानदेय पर विरोध, सरकार को दी ये चेतावनी
रायबरेली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय और अधिकारों की मांग को लेकर धरना दिया, उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा
विजय पटेल
रायबरेली, 29 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश के रायबरेली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने आज अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। “आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश” के आह्वान पर विकास भवन परिसर में आयोजित एक दिवसीय धरने में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। धरने के दौरान जोरदार नारेबाजी हुई और कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की।
मानदेय में सुधार की मांग
धरने का नेतृत्व कर रहीं जिला अध्यक्ष लीला पांडे ने कहा कि महंगाई के इस दौर में मात्र 6000 रुपये के मानदेय में घर चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि “6000 रुपये में कैसे चले घर?” इतने कम मानदेय में न तो परिवार का भरण-पोषण संभव है और न ही बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी हो पा रही हैं।

अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें विभागीय कार्यों के अलावा SIR (सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट) जैसे गंभीर जिम्मेदारी वाले कार्य भी कराए जा रहे हैं। दिन-रात मेहनत करने के बावजूद न तो उन्हें अतिरिक्त मानदेय मिल रहा है और न ही किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा। फील्ड वर्क, सर्वे, पोषण और अब डिजिटल डेटा एंट्री जैसे कार्यों का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
मुख्य मांगें और चेतावनी
संयुक्त मोर्चा की ओर से कई प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, कार्य के घंटों और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के अनुसार प्रोत्साहन राशि, सरकारी कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा लाभ शामिल हैं। लीला पांडे ने चेतावनी दी कि यह धरना फिलहाल सांकेतिक है, यदि सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। धरने के चलते विकास भवन परिसर में दिनभर गहमागहमी बनी रही। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी और सुरक्षा व शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।






