Uttar Pradesh

ब्रजभूमि से CM योगी का संदेश : संतों की एकता से मिटेगा हर संकट, सनातन शक्ति का दिखेगा उत्कर्ष

मलूकदास जयंती महोत्सव में मुख्यमंत्री ने अयोध्या से काशी तक बदलाव गिनाए, संत परंपरा और सांस्कृतिक एकता को बताया भारत की सबसे बड़ी ताकत

मथुरा, 8 अप्रैल 2026:

ब्रजभूमि के वृंदावन में आयोजित जगद्गुरु द्वाराचार्य श्री मलूकदास जी महाराज की 452वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों और सनातन समाज को एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि जब संत एक स्वर में खड़े होते हैं तो सदियों पुरानी बाधाएं भी समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि 500 वर्षों का कलंक संतों की एकता और समाज की आस्था से मिटा है।

श्रीसीताराम निकुंज अष्टयाम लीला महोत्सव में संतों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले अयोध्या की स्थिति बेहद खराब थी। सीमित बिजली, संकरी गलियां और अव्यवस्था थी लेकिन आज वही अयोध्या त्रेतायुग की स्मृति को जीवंत करती है। उन्होंने इसे संतों के आशीर्वाद और सशक्त नेतृत्व का परिणाम बताया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सनातन समाज को चेताते हुए कहा कि यदि सभी सनातनी एकजुट होकर अपनी शक्ति का अहसास कराएं.तो कोई भी भारत के खिलाफ षड्यंत्र नहीं कर सकता। उन्होंने चरैवेति-चरैवेति के मंत्र के साथ निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया और कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ को राष्ट्र और धर्म के हित से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

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कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने श्रीमलूकपीठ आश्रम में दर्शन-पूजन किया और गोपूजन कर गायों को गुड़ खिलाया। उन्होंने संत मलूकदास की परंपरा को मानवता, करुणा और सेवा का प्रतीक बताते हुए कहा कि दूसरे के दुख को अपना समझना ही सच्चा धर्म है।

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CM Yogi in Braj Unity of Saints for Progress (1)

इतिहास का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 1528 में बाबर के सिपहसालार मीर बाकी द्वारा राम मंदिर तोड़े जाने के बावजूद आज भव्य मंदिर का निर्माण भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है। उन्होंने संत तुलसीदास का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने मुगल दरबार के आकर्षण को ठुकराकर श्रीराम को ही भारत का सच्चा राजा बताया।

सीएम योगी ने ब्रजभूमि की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, गोकुल, नंदगांव जैसे तीर्थ सनातन चेतना के केंद्र हैं। उन्होंने बताया कि ब्रज तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से इन स्थलों के संरक्षण और विकास पर काम किया जा रहा है जिससे विरासत और विकास साथ-साथ आगे बढ़ें।

काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जहां 50 लोग एक साथ दर्शन नहीं कर पाते थे, वहीं आज 50 हजार श्रद्धालु एक साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं। उन्होंने इसे डबल इंजन सरकार की गति और प्रगति का उदाहरण बताया। कार्यक्रम में मलूक पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य, संत बलराम दास देवाचार्य, संत फूलडोल बिहारी दास, राम वृषपाल दास सहित अनेक संत-महात्मा और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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