Varanasi

दालमंडी में बुलडोजर पर ब्रेक, हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण कार्रवाई रोकी

वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण परियोजना से प्रभावित भवन स्वामियों को राहत, 20 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश, राज्य सरकार और नगर निगम से मांगा जवाब

न्यूज डेस्क, 13 जून 2026:

वाराणसी की बहुचर्चित दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण योजना से जुड़े भवन ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रभावित पक्षों को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायालय ने परियोजना के दायरे में आने वाले विवादित भवनों के ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक लगाते हुए अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सलील कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अलिमुन निशा, जुल करनैन और राशिद जफर द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाओं में वाराणसी नगर निगम की ओर से गत 26 मई को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम के तहत जारी किए गए ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत दलीलों में कहा गया कि नगर निगम ने उनके मकानों को जर्जर घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है जबकि उनकी ओर से दाखिल आपत्तियों पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में भवन गिराने की कार्रवाई कानून सम्मत नहीं मानी जा सकती। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि पूर्व में न्यायालय ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संयुक्त समिति गठित कर प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने का निर्देश दिया था।

Dalmandi Demolition Halted High Court's Decision (1)

हालांकि बाद में जारी नोटिस में यह कहा गया कि संयुक्त समिति की रिपोर्ट में संबंधित भवनों को जर्जर पाया गया है और सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए उनका ध्वस्तीकरण आवश्यक है। इस पर याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार तथा अन्य प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है। इसके साथ ही खंडपीठ ने अगली सुनवाई की तारीख 20 जुलाई 2026 निर्धारित करते हुए तब तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना से प्रभावित भवन स्वामियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार और नगर निगम को अपने निर्णय तथा कार्रवाई का आधार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी।

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