Uttarakhand

देहरादून जू में पर्यटकों के लिए खास मेहमान …करें हिमालयन ब्लैक भालू का दीदार

पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल ने किया हिमालयन काले भालू के बाड़े का उद्घाटन, कहा- वन्यजीव संरक्षण उत्तराखंड सरकार की प्राथमिकता

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 7 मई 2026:

उत्तराखंड के देहरादून जू पर्यटकों के लिए अब और खास हो गया है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक खास मेहमान को लाया गया है। इस खास मेहमान का नाम है हिमालयन काला भालू। इसका नाम भी बहुत प्यारा है।

प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून जू के मालसी परिसर में हिमालयन काले भालू के अत्याधुनिक नए बाड़े का उद्घाटन किया। साथ ही इसे पर्यटकों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालयन काला भालू ‘बल्लू’ आने से जू की लोकप्रियता बढ़ेगी। वन मंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

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उन्होंने बताया कि ‘फॉरेस्ट कंजर्वेशन’ के तहत वन्यजीव विनिमय कार्यक्रम को भविष्य में और अधिक तेजी दी जाएगी। केंद्र सरकार से परिवहन संबंधी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त होने के बाद राज्य में उपलब्ध अतिरिक्त वन्यजीवों को अन्य राज्यों के नेशनल पार्कों और चिड़ियाघरों में उनकी पारिस्थितिक जरूरतों के अनुरूप स्थानांतरित किया जाएगा।

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इस पहल से न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में जैव-विविधता का संतुलन भी बना रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैव-विविधता की दृष्टि से बेहद समृद्ध राज्य है। वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और उनके सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रहे हैं।

वन मंत्री ने देहरादून जू प्रशासन और वन विभाग की टीम को नए बाड़े के निर्माण एवं बेहतर व्यवस्थाओं के लिए बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस नए बाड़े से पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को हिमालयी वन्यजीवों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त होगी।

सुबोध उनियाल ने बताया कि ‘फॉरेस्ट कंजर्वेशन’ के तहत वन्यजीव विनिमय कार्यक्रम को भविष्य में और अधिक तेजी दी जाएगी। केंद्र सरकार से परिवहन संबंधी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त होने के बाद राज्य में उपलब्ध अतिरिक्त वन्यजीवों को अन्य राज्यों के नेशनल पार्कों और चिड़ियाघरों में उनकी पारिस्थितिक जरूरतों के अनुरूप स्थानांतरित किया जाएगा। इस पहल से न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में जैव-विविधता का संतुलन भी बना रहेगा।

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