
लखनऊ, 29 जुलाई 2026:
यूपी ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत देश में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश अब गुजरात के बाद 7 लाख से अधिक आवासीय रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने वाला भारत का दूसरा राज्य बन गया है। यह उपलब्धि एक सरकारी योजना की सफलता के साथ स्वच्छ ऊर्जा को जन आंदोलन का रूप देने की दिशा में प्रदेश की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
यूपीनेडा, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल), सभी डिस्कॉम, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, बैंकिंग संस्थानों, प्रशासन और सौर ऊर्जा उद्योग के समन्वित प्रयासों से प्रदेश ने रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
योजना के तहत आए 11.58 लाख से अधिक आवेदन
जुलाई 2026 तक प्रदेश में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत 11.58 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 7,03,661 से अधिक आवासीय रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनसे 2,371.14 मेगावाट से अधिक स्वच्छ ऊर्जा क्षमता विकसित हुई है। महज ढाई वर्षों में हासिल की गई यह उपलब्धि राज्य की प्रभावी नीतियों, डिजिटल पारदर्शिता, तेज क्रियान्वयन और आम लोगों की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण मानी जा रही है।
करीब 12 हजार एकड़ भूमि की होती जरूरत
रूफटॉप सोलर मॉडल का सबसे बड़ा लाभ भूमि संरक्षण के रूप में सामने आया है। यदि इतनी क्षमता पारंपरिक ग्राउंड-माउंटेड सोलर पार्कों के जरिए स्थापित की जाती तो करीब 12,000 एकड़ भूमि की आवश्यकता पड़ती। घरों की छतों पर सोलर संयंत्र लगने से यह भूमि कृषि, उद्योग, आवास और अन्य सार्वजनिक उपयोगों के लिए सुरक्षित बनी हुई है। इससे भूमि अधिग्रहण की जरूरत भी काफी कम हुई है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है।
सोलर संयंत्रों से रोज औसतन 1.07 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन
प्रदेश में स्थापित सोलर संयंत्रों से प्रतिदिन औसतन 1.07 करोड़ यूनिट स्वच्छ और निःशुल्क बिजली का उत्पादन हो रहा है। औसत बिजली दर ₹6.50 प्रति यूनिट के आधार पर इसकी आर्थिक कीमत लगभग ₹6.94 करोड़ प्रतिदिन आंकी गई है। इसका सीधा लाभ लाखों परिवारों को मिल रहा है, जिनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। अनुमान है कि इन संयंत्रों से हर वर्ष करीब 389 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा, जिससे पारंपरिक बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम होगी और प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत बनेगी।
सालाना 32 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन से बचाव
पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर भी योजना के प्रभाव उल्लेखनीय हैं। रूफटॉप सोलर के जरिए हर वर्ष लगभग 32 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन से बचाव हो रहा है। यह लाभ करीब 14.5 करोड़ परिपक्व वृक्षों द्वारा एक वर्ष में अवशोषित किए जाने वाले कार्बन के बराबर माना गया है। इससे उत्तर प्रदेश जलवायु परिवर्तन से निपटने और भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
सृजित हुए 85 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार
यह योजना हरित रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही है। यूपीनेडा के तहत प्रदेश में 7,000 से अधिक कंपनियां पंजीकृत होकर कार्य कर रही हैं। इनके माध्यम से 85,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, विद्युत उपकरण, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाओं, एमएसएमई, स्टार्टअप और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े क्षेत्रों में लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी विकसित हुए हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य योजना का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचाना, स्थापना की रफ्तार को और तेज करना, डिजिटल प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा निवेश और नवाचार को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश को देश की ‘रूफटॉप सोलर कैपिटल’ के रूप में स्थापित करना है। मौजूदा उपलब्धियां इस दिशा में प्रदेश की तेज प्रगति का संकेत दे रही हैं।






