UP में अब सबूत बोलेंगे : वैज्ञानिक जांच से अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, युवाओं को मिलेंगे नए अवसर
टेकसंगम 2026 : सीएम योगी ने गिनाईं साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियां, एआई से लेकर क्वांटम तकनीक तक पर होगा मंथन

लखनऊ, 24 अक्टूबर 2026:
यूपी में अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अब वैज्ञानिक साक्ष्यों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। साइबर अपराधों की जांच से लेकर डिजिटल सबूतों की विश्वसनीयता तक न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में तकनीक अहम भूमिका निभा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि तकनीक की नई संभावनाओं को जनहित, न्याय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक विज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रशिक्षित मानव संसाधन को बढ़ावा देना होगा।
लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित ‘टेकसंगम 2026’ में प्रतिभाग करने से पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यह बात कही। उन्होंने बताया कि आयोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम तकनीक और डेटा प्रोटेक्शन जैसे उभरते विषयों पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य तकनीकी नवाचार को नागरिकों की सुरक्षा, बेहतर न्याय व्यवस्था और डिजिटल भरोसे से जोड़ना है।
2017 से पहले सिर्फ दो साइबर थाने और चार फॉरेंसिक लैब
मुख्यमंत्री ने टेकसंगम को उत्तर प्रदेश की बदलती कार्य-संस्कृति का प्रतीक बताया। उनके मुताबिक वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल दो साइबर थाने और चार फॉरेंसिक लैब थीं। वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी और तकनीक के सीमित इस्तेमाल के कारण अपराधियों को कानून से बच निकलने का मौका मिलता था। उस समय प्रदेश का कन्विक्शन रेट यानी अदालत में दोष सिद्ध होने की दर 30 प्रतिशत से भी कम थी।
योगी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश सरकार ने इस स्थिति को बदलने के लिए कदम उठाए। अब सभी 75 जिलों में साइबर थाने स्थापित हैं। हर मंडल में फॉरेंसिक लैब विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। आधुनिक तकनीकी संसाधनों और वैज्ञानिक जांच की क्षमता बढ़ने से साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री ने कन्विक्शन रेट में भी वृद्धि होने की बात कही।
युवाओं के लिए पढ़ाई, रिसर्च और रोजगार के नए रास्ते
मुख्यमंत्री के अनुसार फॉरेंसिक साइंस और साइबर सुरक्षा केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं हैं। इन क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। इससे युवाओं को तकनीक आधारित करियर बनाने का मौका मिलेगा। टेकसंगम 2026 में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच साइबर सुरक्षा, डिजिटल सबूतों की विश्वसनीयता और नई तकनीकों के जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल पर चर्चा होगी।
तकनीक की नई संभावनाओं को जनहित, न्याय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान व प्रशिक्षित मानव संसाधन को बढ़ावा देना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से आज उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में आयोजित ‘टेकसंगम 2026’ में प्रतिभाग करूंगा। एआई, साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम तकनीक और डेटा प्रोटेक्शन जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित यह आयोजन तकनीकी नवाचार को नागरिक सुरक्षा, प्रभावी न्याय व्यवस्था व डिजिटल ट्रस्ट से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है।
यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की बदलती कार्य-संस्कृति का प्रतीक है। वर्ष 2017 से पहले देश की सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश में केवल 2 साइबर थाने और 4 फॉरेंसिक लैब थीं। विज्ञान और तकनीक की संभावनाओं का पर्याप्त उपयोग न होने और वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव में अपराधियों को कानून से बच निकलने का अवसर मिलता था। कन्विक्शन रेट 30 प्रतिशत से भी कम था।
वर्ष 2017 के बाद प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने इस स्थिति को बदलने की दिशा में कार्य किया। आज सभी 75 जनपदों में साइबर थाने हैं और प्रत्येक मंडल में फॉरेंसिक लैब स्थापित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
तकनीकी संसाधनों एवं वैज्ञानिक जांच की क्षमता के विस्तार से साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने और अपराधियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया को मजबूती मिली है। कन्विक्शन रेट में वृद्धि हुई है।
साथ ही, फॉरेंसिक विज्ञान एवं साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। तकनीक आज प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के साथ युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने का माध्यम बन रही है।
देश-विदेश के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने वाला आज का यह आयोजन साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता एवं उभरती तकनीकों के उत्तरदायी उपयोग पर सार्थक विमर्श के साथ अनुसंधान, शिक्षा व उद्योग के बीच सहयोग के नए द्वार खोलेगा।
भारत को उभरती तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने और उनके माध्यम से नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने की दिशा में यह संगम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा आत्मनिर्भर भारत के सामर्थ्य से विकसित भारत के संकल्प को नई गति प्रदान करेगा।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 24, 2026
सीएम योगी ने उम्मीद जताई कि यह आयोजन अनुसंधान, शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाएगा। इसके साथ ही भारत को उभरती तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने और नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित व सुगम बनाने में योगदान देगा।






