प्रयागराज, 1 अगस्त 2026:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि राज्य के कई थाने कानून-व्यवस्था संभालने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। कोर्ट ने बलिया के रसड़ा थाने से जुड़े मामले में डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को जांच कर जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
ट्रक विवाद से कोर्ट तक पहुंचा मामला
यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने बलिया निवासी हरेंद्र यादव की याचिका पर दिया। याचिका में एआरटीओ बलिया की ओर से ट्रक को ब्लैकलिस्ट कर उसके हस्तांतरण पर रोक लगाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई में सामने आई चौंकाने वाली बातें
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार ने अपने जीपीएफ से पैसा निकालकर हरेंद्र यादव के नाम पर एक ट्रक खरीदा था। इसके बाद दोनों ने मिलकर ट्रांसपोर्ट का कारोबार शुरू किया। बाद में दोनों के बीच विवाद हुआ तो पुलिस विभाग के प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने आए।
याचिका के मुताबिक रसड़ा थाने के उपनिरीक्षक शिव मूर्ति तिवारी ने एआरटीओ को रिपोर्ट भेजी, जिसके आधार पर ट्रक को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और उसके ट्रांसफर पर रोक लगा दी गई।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी में रहते हुए कारोबार करने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं होना गंभीर मामला है। अदालत ने कहा कि अगर यही हाल रहा तो कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। कोर्ट की टिप्पणी थी कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि पूरा रसड़ा थाना ही व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल है।
10 दिन में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश की प्रति 48 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही डीजीपी को जांच के बाद की गई कार्रवाई का हलफनामा 10 दिन के भीतर अदालत में दाखिल करने को कहा है।






