
लखनऊ, 20 अगस्त 2026:
कठिन विषय अब सिर्फ किताबों के पन्नों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रहेंगे। भौतिक विज्ञान के जटिल सिद्धांत, रसायन विज्ञान की कठिन अवधारणाएं, जीव विज्ञान के पेचीदा टॉपिक या गणित के उलझे सवाल विद्यार्थियों को वीडियो, एनीमेशन, रील्स और अन्य दृश्य माध्यमों से आसान तरीके से समझाने की तैयारी शुरू हो गई है। योगी सरकार माध्यमिक शिक्षा को तकनीक से जोड़ते हुए शिक्षकों की विषय विशेषज्ञता को डिजिटल संसाधनों के साथ जोड़ने पर जोर दे रही है।
इसी कड़ी में यूपी के राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक वीडियो निर्माण संबंधी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में लखनऊ मंडल के विभिन्न माध्यमिक विद्यालयों से 18 प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापकों ने प्रतिभाग किया। सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक चली कार्यशाला का शुभारंभ एसआईईटी निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने किया। इस अवसर पर अपर निदेशक, व्यावसायिक शिक्षा सुरेंद्र तिवारी, एसआईईटी के प्रशासनिक अधिकारी अजीत कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कोविड के अनुभव को अब बनाया जाएगा बड़ा डिजिटल मॉडल
कार्यशाला में कोविड-19 के दौरान बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से तैयार किए गए शैक्षिक वीडियो के अनुभवों को साझा किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि कम समय में वीडियो, रील्स, एनीमेशन और बुलेट प्वाइंट जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर कठिन विषयों को विद्यार्थियों के लिए सहज बनाया जा सकता है। इसी अनुभव को अब विषयवार और अधिक गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री तैयार करने में इस्तेमाल किया जाएगा।
हर विषय के ‘कठिन चैप्टर’ पर डिजिटल फोकस
कार्यशाला में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र और गणित जैसे विषयों पर शैक्षिक वीडियो तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। शिक्षकों को बताया गया कि डिजिटल कंटेंट केवल जानकारी देने वाला नहीं अपितु विद्यार्थियों के कक्षा स्तर, सीखने की गति और जरूरत के अनुरूप होना चाहिए। दृश्य सामग्री के जरिये कठिन अवधारणाओं को चरणबद्ध ढंग से समझाने पर विशेष जोर दिया गया।
पहले शिक्षक सीखेंगे, फिर विद्यार्थियों तक पहुंचेगी आसान पढ़ाई
एससीईआरटी के प्रवक्ता कमल किशोर ने शैक्षिक वीडियो की रूपरेखा और निर्माण से जुड़े दिशा-निर्देश साझा किए। प्रतिभागी शिक्षकों को विषयवस्तु के चयन, प्रस्तुतीकरण और वीडियो निर्माण की तकनीकी बारीकियों की जानकारी दी गई। कार्यशाला के समापन पर एसआईईटी निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने शिक्षकों के साथ आगे की कार्ययोजना साझा की।
योगी सरकार की यह पहल तकनीक को शिक्षक का विकल्प बनाने के बजाय शिक्षक की विशेषज्ञता को और ताकत देने की दिशा में है। डिजिटल सामग्री के जरिये विद्यार्थी कठिन टॉपिक को जरूरत के मुताबिक बार-बार देख और समझ सकेंगे। यानी अब ‘कठिन अध्याय’ सिर्फ परीक्षा का डर नहीं अपितु वीडियो की मदद से समझने का आसान अनुभव भी बन सकेगा।






