Lucknow City

लखनऊ में ‘नशे की फैक्ट्री’ पर ANTF-FSDA का शिकंजा! 228 किलो ड्रग्स जब्त, 6 अरेस्ट

9.60 लाख एल्जोमैक, 1.20 लाख ट्रामाडोल कैप्सूल और 720 कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें बरामद, फर्म के दस्तावेजों की आड़ में चल रही थी बिलिंग, एक फर्म सील, नेटवर्क की बाकी कड़ियां खंगाल रही एजेंसियां

लखनऊ, 5 सितंबर 2026:

यूपी में नशे के कारोबार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राजधानी लखनऊ में एएनटीएफ और एफएसडीए ने नशीली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क पर करारा प्रहार किया है। शहर के ट्रांसपोर्ट नगर में संयुक्त कार्रवाई के दौरान करीब 228 किलोग्राम नशीली दवाएं बरामद करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बरामद खेप में लाखों की संख्या में प्रतिबंधित एवं नशीली दवाएं और कोडीनयुक्त कफ सिरप शामिल हैं। कार्रवाई से नशीली दवाओं की सप्लाई, बिलिंग और वितरण से जुड़े नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है।

एक खेप ने खोल दी पूरे नेटवर्क की परतें

एएनटीएफ लखनऊ यूनिट को ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवाओं की बड़ी खेप पहुंचने की सूचना मिली थी। 3 सितंबर को टीम ने मकान संख्या एस-363/364 के आसपास निगरानी शुरू की। इसी दौरान तीन संदिग्ध कार्टूनों को बोरियों में छिपाते नजर आए। तलाशी में किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद के कब्जे से बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं मिलीं।

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बरामदगी में 9.60 लाख एल्जोमैक-0.5 (एल्प्राजोलाम) टैबलेट, 1.20 लाख स्पैसमोनाम प्लस (ट्रामाडोल एचसीएल) कैप्सूल और कोडीनयुक्त ओनेरेक्स 100 एमएल कफ सिरप की 720 बोतलें शामिल हैं। टीम ने सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद भी बरामद किए। एफएसडीए के औषधि निरीक्षकों ने दवाओं के नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए।

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पूछताछ में सामने आई ‘बिलिंग’ की चाल

पूछताछ में किशन वासवानी और समीर अहमद ने दवाओं की सप्लाई कन्हैया फार्मा के संचालक उमेश कुमार से होने की जानकारी दी। इसके बाद उमेश कुमार और सतेन्द्र सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि उमेश कथित तौर पर सतेन्द्र सिंह की फर्म के दस्तावेजों का इस्तेमाल नशीली दवाओं की बिलिंग के लिए करता था और इसके बदले सतेन्द्र को कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है। एफएसडीए की जांच में कन्हैया फार्मा से प्रॉक्सीमेक-एसपीएएस कैप्सूल के 1,116 डिब्बों समेत सात प्रकार की दवाएं मिलीं। खरीद-बिक्री के पूरे अभिलेख उपलब्ध न करा पाने पर एफएसडीए ने फर्म को सील कर दिया।

एक और सप्लायर का नाम, जांच का दायरा बढ़ा

शाद इरशाद से पूछताछ में विशाल चौरसिया का नाम सामने आया, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में विशाल ने शाद को नशीली दवाओं की आपूर्ति करने की बात बताई। जांच में यह भी सामने आया कि कोडीन से जुड़े मामले में अमीनाबाद थाने में एफआईआर के बाद उसका दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका था। इसके बावजूद वह कथित तौर पर दूसरी फर्मों के जरिए कारोबार कर रहा था। कोडीनयुक्त सिरप के संबंध में उसने इसे बृजेश वर्मा से खरीदने की बात बताई है।

सभी छह आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। एजेंसियां अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सप्लाई की बाकी कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य एप के जरिए की गई।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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