
लखनऊ, 21 सितंबर 2026:
यूपी के सरकारी अस्पतालों में बॉन्ड पर सेवा दे रहे डॉक्टरों का आक्रोश सोमवार को एक बार फिर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिखा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से यहां पहुंचे बॉन्डेड डॉक्टरों ने वेतन में कथित असमानता के विरोध में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव और प्रदर्शन किया। डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले 14 महीने से समान वेतन और लंबित एरियर की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने कहा कि 2 सितंबर को प्रदर्शन के दौरान बारिश के बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक खुद उनसे मिलने पहुंचे थे। डॉक्टरों के मुताबिक उस दौरान उन्होंने उनकी मांग पूरी कराने का आश्वासन देते हुए कहा था- ‘आप हमारे बच्चे हैं, आपकी मांग जरूर पूरी होगी।’ डॉक्टरों का दावा है कि उन्हें 3 सितंबर को दोपहर दो बजे तक शासनादेश जारी होने का भरोसा दिया गया था लेकिन 19 दिन बीतने के बाद भी शासनादेश जारी नहीं हुआ।

डॉक्टरों का कहना है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की पीएचसी, सीएचसी और दूसरे सरकारी अस्पतालों में बॉन्ड पर तैनात डॉक्टरों को करीब 50 से 55 हजार रुपये मासिक मानदेय मिल रहा है। दूसरी तरफ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड सेवा कर रहे डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये महीने तक भुगतान किया जा रहा है। उनका सवाल है कि जब सभी के पास समान MBBS डिग्री है, बॉन्ड की शर्त समान है और सेवा भी सरकारी व्यवस्था में ही दे रहे हैं तो वेतन में इतना अंतर क्यों?
बॉन्ड सेवा के तहत डॉक्टरों को दो साल की अनिवार्य सरकारी सेवा करनी होती है या फिर 10 लाख रुपये के बॉन्ड की शर्त पूरी करनी होती है। प्रदर्शनकारी डॉक्टर समान वेतन व्यवस्था लागू करने के साथ अब तक के लंबित एरियर के भुगतान की भी मांग कर रहे हैं।
"अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाना ही हमारी जनसेवा का सबसे बड़ा उद्देश्य है"
आज दिनांक 21 सितंबर, 2026 को आवास पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पधारे नागरिकों से आत्मीय भेंटकर उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं एवं जनहित से जुड़े विषयों को पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता… pic.twitter.com/fK0LJ9PtS7
— Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) September 21, 2026
डॉक्टरों ने कहा कि वे प्रदेश में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनका आरोप है कि बार-बार लखनऊ आने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम ने शासनादेश का आश्वासन दिया था इसलिए वे लगातार उन्हीं से जवाब मांग रहे हैं। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि आश्वासन और सोशल मीडिया पोस्ट के बावजूद उन्हें उनका अधिकार नहीं मिला। उनका कहना है कि जब तक समान वेतन और एरियर को लेकर ठोस निर्णय नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।






