
वाराणसी, 27 सितंबर 2026:
यूपी में 200 टन से ज्यादा वजन का वेसल लेकर चल रहा 308 पहियों वाला विशाल मल्टी-एक्सल ट्रेलर वाराणसी के रास्ते में पहुंचने से पहले ही कई जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए चुनौती बन गया है। चंदौली के पचफेड़वा के पास रिंग रोड का पुल इसकी ऊंचाई के कारण रास्ते में आ गया। अब महाट्रक को आगे निकालने के लिए प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस की टीमें रास्ता तैयार कराने में जुटी हैं। बारिश के चलते वैकल्पिक मार्ग बनाने का काम भी मुश्किल हो गया है। वहीं वाराणसी में डाफी टोल प्लाजा पर अतिरिक्त जगह बनाने व तीन फुट ओवर ब्रिज के हिस्से हटाने का काम किया जा रहा है।
पचफेड़वा में पुल बना रास्ते की बड़ी बाधा
308 पहियों वाला यह Mega Trailer शनिवार को बारिश के कारण चंदौली से बनारस की तरफ आगे नहीं बढ़ सका। पचफेड़वा के पास रिंग रोड का पुल ट्रेलर की ऊंचाई व आकार के कारण बाधा बन रहा है। इसके बाद टीमों ने महाट्रक को निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की कवायद शुरू की। रास्ते में मिट्टी आदि डालकर मार्ग को मजबूत किया जा रहा था, लेकिन बारिश से जमीन गीली होने के कारण काम में दिक्कत आई। चंदौली में ट्रक रुकते ही भीड़ उमड़ पड़ी। लोग सेल्फी लेकर ट्रक की फोटो खींचने में लगे रहे।
आगे के रूट की जांच, जहां अड़चन वहां तैयारी
महाट्रक के वाराणसी पहुंचने से पहले ट्रैफिक पुलिस पूरे रूट का निरीक्षण कर रही है। बनारस से गाजीपुर की तरफ जिन स्थानों पर ट्रेलर के आकार के कारण परेशानी हो सकती है, वहां रास्ते की स्थिति देखी जा रही है। जरूरत के मुताबिक सड़क चौड़ी करने, बाधाएं हटाने व वैकल्पिक व्यवस्था बनाने पर काम किया जा रहा है। पुलिस, हाईवे पेट्रोलिंग टीम व तकनीकी कर्मचारी भी काफिले के साथ चल रहे हैं।

तीन फुटओवर ब्रिज भी बने बाधा
वाराणसी में आगे बढ़ने पर महाट्रक के सामने तीन फुटओवर ब्रिज की चुनौती है। प्रशासन व NHAI की जांच में इन पुलों के कुछ हिस्सों को वाहन की ऊंचाई के हिसाब से बाधक पाया गया है। इन्हें जरूरत के मुताबिक अस्थायी रूप से हटाने की तैयारी है। महाट्रक निकलने के बाद इन हिस्सों को दोबारा तैयार किया जाएगा। डाफी टोल प्लाजा पर भी बड़े वाहन को निकालने के लिए अतिरिक्त जगह तैयार की गई है।
308 पहियों पर 200 टन से ज्यादा का भार
इस विशेष मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर शुगर मिल का भारी-भरकम वेसल लदा है। करीब 100 फीट लंबे ट्रेलर में 308 पहिए लगाए गए हैं, जिससे 200 टन से ज्यादा के वजन को सड़क पर संतुलित रखा जा सके। यह वेसल समुद्री रास्ते से बेल्जियम से ओडिशा के पारादीप पोर्ट पहुंचा था। वहां से इसे सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश लाया जा रहा है।
दिनभर में 8 से 12 किलोमीटर ही सफर, दो करोड़ का डीजल पी चुका ट्रक
वजन व आकार के कारण महाट्रक की रफ्तार सामान्य भारी वाहनों जैसी नहीं है। काफिला एक दिन में करीब 8 से 12 किलोमीटर ही आगे बढ़ पा रहा है। ओडिशा से निकला यह काफिला झारखंड के रास्ते बिहार के रोहतास, गया, औरंगाबाद व कैमूर से होते हुए चंदौली पहुंचा है। रास्ते में कई स्थानों पर बिजली के तार, पुल व दूसरे ढांचों को देखते हुए विशेष इंतजाम करने पड़े। ट्रेलर चालक के मुताबिक सफर के दौरान अब तक करीब दो करोड़ रुपये का डीजल खर्च हो चुका है।

दो क्रेन, अतिरिक्त ट्रेलर व 64 से ज्यादा कर्मचारी
पूरे ऑपरेशन में दो क्रेन भी काफिले के साथ चल रही हैं। जरूरत पड़ने पर दो अन्य ट्रेलर महाट्रक को खींचने में मदद करते हैं। काफिले के साथ 64 से ज्यादा कर्मचारी तैनात हैं। चालक के मुताबिक अब तक सफर में करीब दो करोड़ रुपये का डीजल खर्च हो चुका है।
लखीमपुर में प्लांट के लिए जा रहा वेसल
यह वेसल लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल की यूनिट में प्रस्तावित प्लांट के लिए ले जाया जा रहा है। यहां गन्ने से PLA यानी बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक व को-पॉलिमर के निर्माण के साथ रिसर्च की योजना है। प्लांट पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई है, जबकि प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 100 टन प्रतिवर्ष बताई गई है।






