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विंध्य त्रिकोण में उमड़ा आस्था का सैलाब : दो साल में 60% बढ़े श्रद्धालु, शक्तिपीठ सर्किट का केंद्र बनेगा विंध्याचल

मां विंध्यवासिनी, काली खोह और अष्टभुजा धाम में 2025 में पहुंचे 1.84 करोड़ दर्शनार्थी, 208 करोड़ रुपये से संवर रहा धार्मिक पर्यटन का आधारभूत ढांचा, यूपीएसटीडीसी ने शुरू किए दो विशेष टूर पैकेज

लखनऊ/मिर्जापुर, 18 अक्टूबर 2026:

यूपी के विंध्याचल में आस्था का दायरा अब एक मंदिर तक सीमित नहीं रहा। मां विंध्यवासिनी, मां काली खोह और मां अष्टभुजा के दर्शन को जोड़ने वाली सदियों पुरानी विंध्य त्रिकोण परिक्रमा धार्मिक पर्यटन का बड़ा आकर्षण बनकर उभर रही है। तीनों मंदिरों में वर्ष 2025 के दौरान करीब 1.84 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। 2023 में यह संख्या लगभग 1.15 करोड़ थी। यानी दो साल में दर्शनार्थियों की संख्या में करीब 60 प्रतिशत का उछाल आया। बढ़ती आस्था को पर्यटन और रोजगार से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार विंध्याचल को विस्तारित शक्तिपीठ सर्किट के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में जुटी है।

अकेले विंध्यवासिनी धाम में पहुंचे 1.20 करोड़ श्रद्धालु

विंध्य त्रिकोण में मां विंध्यवासिनी धाम श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। वर्ष 2023 में यहां करीब 73 लाख दर्शनार्थी पहुंचे थे। यह संख्या 2024 में बढ़कर 78.15 लाख और 2025 में करीब 1.20 करोड़ हो गई। दो साल में श्रद्धालुओं की संख्या में लगभग 64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2026 में भी आस्था की यह रफ्तार बरकरार है। जनवरी से अगस्त तक ही करीब 90 लाख श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर चुके थे। यह आंकड़ा पिछले पूरे साल की कुल संख्या का करीब 75 प्रतिशत है। शारदीय नवरात्र से पहले की इस संख्या के बाद सालाना दर्शनार्थियों का नया रिकॉर्ड बनने की संभावना है।

काली खोह-अष्टभुजा धाम भी बने आकर्षण

धार्मिक पर्यटन का विस्तार मां विंध्यवासिनी मंदिर के साथ काली खोह और अष्टभुजा धाम तक भी पहुंचा है। वर्ष 2023 में इन दोनों मंदिरों में कुल करीब 42.36 लाख श्रद्धालु आए थे, जो 2025 में बढ़कर लगभग 64 लाख हो गए। इस तरह दो साल में यहां दर्शनार्थियों की संख्या 51 प्रतिशत से अधिक बढ़ी। परंपरागत रूप से विंध्य त्रिकोण परिक्रमा मां विंध्यवासिनी मंदिर से शुरू होकर मां काली खोह और फिर मां अष्टभुजा मंदिर तक पहुंचती है। एक ही यात्रा में देवी के तीन स्वरूपों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए इस धार्मिक मार्ग को खास बनाते हैं।

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208 करोड़ से विकास, रोपवे से आसान हुई पहुंच

विंध्याचल में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर क्षेत्रों के विकास पर करीब 208.09 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें परिक्रमा पथ, संपर्क मार्ग, सड़कें, मां की पैड़ी और मंदिर परिसर की सुविधाओं का विस्तार शामिल है। पहाड़ी मंदिरों तक पहुंच आसान बनाने में रोपवे भी अहम भूमिका निभा रहा है। वहीं, मां काली खोह क्षेत्र के विकास के लिए 35.50 करोड़ रुपये की परियोजना अक्टूबर में निविदा प्रक्रिया तक पहुंच गई। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विंध्याचल को केवल एक मंदिर तक सीमित रखने के बजाय संपूर्ण शक्ति पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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वाराणसी से प्रयागराज तक जुड़ेंगे धार्मिक पर्यटन के रास्ते

धार्मिक यात्रा को व्यवस्थित बनाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने ‘विजिट माय स्टेट’ पहल के तहत दो विशेष टूर पैकेज शुरू किए हैं। दो दिन और एक रात के पैकेज में वाराणसी और विंध्याचल शामिल हैं, जबकि तीन दिन और दो रात का पैकेज लखनऊ, वाराणसी, विंध्याचल और प्रयागराज को जोड़ता है।
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प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात के अनुसार बेहतर कनेक्टिविटी, सुविधाजनक दर्शन और यात्रा पैकेजों से श्रद्धालुओं का सफर आसान होगा। पर्यटकों का ठहराव बढ़ने से होटल, परिवहन, खानपान, फूल-माला और प्रसाद कारोबार को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। विंध्य त्रिकोण अब आस्था के साथ स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को गति देने वाले पर्यटन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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