UP News : प्रदेश की जेलों पर AI का पहरा, 7,000 CCTV कैमरों से निगरानी, डिजिटल लाइब्रेरी से संवरेगा बंदियों का भविष्य
प्रदेश सरकार का कारागारों के आधुनिकीकरण पर जोर, 750 से अधिक AI आधारित कैमरे मुख्यालय के कंट्रोल रूम से जुड़े, इलेक्ट्रिक फेंसिंग, पेपरलेस प्रशासन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी मजबूत होगी व्यवस्था

लखनऊ, 18 अक्टूबर 2026:
यूपी की जेलों में अब सुरक्षा का पहरा पहले से ज्यादा मजबूत और हाईटेक हो गया है। कारागारों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाकर 7,000 के पार पहुंचा दी गई है। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली, इलेक्ट्रिक फेंसिंग और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के जरिए जेलों को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। सुरक्षा के साथ-साथ जेल प्रशासन को डिजिटल बनाने और बंदियों के शैक्षिक विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।
डीजी कारागार एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना के मुताबिक जून 2025 में प्रदेश की जेलों में करीब 4,900 सीसीटीवी कैमरे थे। इनकी संख्या अब बढ़कर 7,000 से अधिक हो गई है। इसके अलावा 750 से ज्यादा एआई आधारित कैमरों को मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। इन कैमरों के जरिए बैरकों और जेल परिसरों में बंदियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। सरकार का उद्देश्य तकनीक के इस्तेमाल से सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
फेंसिंग वायर और इलेक्ट्रिक सिस्टम से मजबूत होगी सुरक्षा
जेलों की सुरक्षा को बहुस्तरीय बनाने के लिए मुख्य दीवारों पर फेंसिंग वायर की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही परिधीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिक फेंसिंग वायर सिस्टम भी स्थापित किया गया है। इन उपायों का मकसद जेल परिसरों की बाहरी सुरक्षा को बेहतर बनाना और संभावित सुरक्षा जोखिमों को कम करना है।
वहीं, समय पूर्व रिहाई के मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए ‘ई-प्रिसंस अर्ली रिलीज प्रोसेसिंग मॉड्यूल’ शुरू किया गया है। इस मॉड्यूल को लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। इससे रिहाई से जुड़े मामलों की प्रक्रिया व्यवस्थित करने और उनके निस्तारण में लगने वाला समय कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
पेपरलेस दफ्तर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर फोकस
कारागारों के प्रशासनिक आधुनिकीकरण के तहत प्रत्येक जेल में मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (एमसीयू) रूम की स्थापना पूरी हो चुकी है। वहीं, कारागार मुख्यालय और जेलों के प्रशासनिक कार्यालयों को पेपरलेस बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा सभी कारागारों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) यूनिट स्थापित की जा रही हैं, ताकि बंदियों की न्यायालयों में पेशी से जुड़ी व्यवस्था को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया जा सके।
74 जेलों में डिजिटल लाइब्रेरी, सौर ऊर्जा पर जोर
कारागारों में बुनियादी सुविधाओं और बंदियों के विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की 74 जेलों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। इनके जरिए बंदियों को पढ़ने और ज्ञान हासिल करने के लिए डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं, ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए जेलों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का काम चल रहा है। प्रदेश की 58 कारागारों में सोलर हाई मास्ट लाइटें भी स्थापित की जा रही हैं। इन पहलों के जरिए सरकार का जोर जेलों को सुरक्षित बनाने के साथ आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रशासन और बंदियों के शैक्षिक विकास से जोड़ने पर है।






