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UP में रजिस्ट्री के बाद अपने आप होगा नामांतरण, संपत्तियों की पहचान के लिए बनेगी यूनिक प्रॉपर्टी आईडी

योगी सरकार की पहल से संपत्ति पंजीकरण में पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी, ऑनलाइन अभिलेखों का होगा सत्यापन, LDA समेत कई संस्थाओं में लागू होगी पायलट व्यवस्था

लखनऊ, 27 अक्टूबर 2026:

यूपी में जमीन और मकान की रजिस्ट्री से लेकर नामांतरण तक की प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी तेज हो गई है। अब संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद खुद ही नामांतरण की व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश में संपत्तियों की विशिष्ट पहचान के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी, स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन और विभिन्न विभागों के अभिलेखों का एकीकरण किया जाएगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में इन प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

हर संपत्ति की होगी अलग पहचान

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कृषि भूमि, आबादी की जमीन, आवासीय और औद्योगिक संपत्तियों के लिए अलग-अलग विभाग यूनिक प्रॉपर्टी आईडी तैयार कर रहे हैं। कृषि भूमि के लिए खसरा आधारित पहचान उपलब्ध है। आबादी की भूमि के लिए 13 अंकों की आईडी यानी घरौनी तैयार की जा रही है।

नगर विकास विभाग के अनुसार, ई-नगर सेवा पोर्टल पर 56.57 लाख संपत्तियां दर्ज हैं। उनके लिए 17 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी सृजित करने का कार्य चल रहा है। संपत्तियों की पहचान के लिए अलग-अलग विभागों के डेटाबेस को जोड़ने से रिकॉर्ड का मिलान और सत्यापन आसान होगा।

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नक्शा परियोजना से सत्यापित होगा स्वामित्व

नगरीय संपत्तियों के लिए नक्शा परियोजना के तहत अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य संपत्तियों के वैधानिक स्वामित्व की पुष्टि करने में मदद करना है। परियोजना के पायलट चरण में 10 नगर निकायों का चयन किया गया है। इनमें गोरखपुर और झांसी नगर निगम के साथ नवाबगंज (बाराबंकी), हरदोई और चित्रकूटधाम शामिल हैं।

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ई-नगरसेवा पोर्टल का इस्तेमाल मुख्य रूप से संपत्ति कर निर्धारण और वसूली के लिए होता है जबकि नक्शा परियोजना स्वामित्व संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। दोनों व्यवस्थाओं के बीच एपीआई के माध्यम से डेटा साझा किया जाएगा। चयनित 10 नगर निकायों में कार्य पूरा करने का लक्ष्य 31 दिसंबर 2026 रखा गया है।

रजिस्ट्री के लिए मान्य होंगे स्वामित्व के दस्तावेज

संपत्ति की खरीद-बिक्री के दौरान स्वामित्व की पुष्टि के लिए मान्य अभिलेखों को चिह्नित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खतौनी और घरौनी को संपत्ति बेचने के अधिकार की प्रथम दृष्टया पुष्टि के लिए मान्य दस्तावेजों के रूप में चिह्नित किया गया है। वहीं, विकास प्राधिकरणों और अन्य संस्थाओं के मामलों में आवंटन पत्र, रजिस्ट्री, बैनामा और लीज डीड जैसे दस्तावेज स्वामित्व के साक्ष्य होंगे।

ऑनलाइन सत्यापन के लिए बनेगी एसओपी

राजस्व अभिलेखों के ऑनलाइन प्रमाणीकरण और अद्यतन के लिए महानिरीक्षक निबंधन, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में समिति गठित की जा चुकी है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर राजस्व विभाग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा। इसमें दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने या अभिलेखों में विवाद की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया भी स्पष्ट की जाएगी।

LDA में भी लागू होगी ये व्यवस्था

रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण के लिए विभिन्न विभागों की पायलट संस्थाओं को स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की प्रणाली से एपीआई के जरिए जोड़ा जाएगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण को इस पहल के लिए चुना गया है। इसके अलावा राजस्व विभाग कुछ राजस्व गांवों, नगर विकास विभाग कम से कम एक नगर निकाय और औद्योगिक विकास विभाग किसी उपयुक्त औद्योगिक विकास प्राधिकरण का चयन करेगा।

इस व्यवस्था से पंजीकृत दस्तावेजों का विवरण संबंधित संस्थाओं तक स्वतः पहुंच सकेगा। इससे नामांतरण की प्रक्रिया सरल बनाने, अभिलेखों में समन्वय बढ़ाने और संपत्ति संबंधी कार्यों में अनावश्यक देरी कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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