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UP Cabinet Meeting : सरकारी डेटा की सुरक्षा के लिए 104 करोड़ का प्लान, IIT कानपुर को जिम्मेदारी, बनेगा सिक्योरिटी सेंटर

UP-CSOC Project : परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी, आईआईटी कानपुर का C3iHub संभालेगा स्थापना व संचालन, सरकारी डिजिटल नेटवर्क की होगी 24 घंटे निगरानी

लखनऊ, 27 अक्टूबर 2026:

उत्तर प्रदेश में सरकारी वेबसाइट, डेटा सेंटर व डिजिटल नेटवर्क को साइबर हमलों से बचाने के लिए नया सुरक्षा केंद्र बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर (UP-CSOC) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना पर जीएसटी सहित 104.28 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। केंद्र की स्थापना व संचालन की जिम्मेदारी आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब C3iHub को देने का प्रस्ताव है।

सरकारी डिजिटल नेटवर्क पर रहेगी चौबीसों घंटे नजर

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के मुताबिक, नए केंद्र से प्रदेश के स्टेट डेटा सेंटर, उत्तर प्रदेश स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (UPSWAN), सरकारी एप्लिकेशन व अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल संसाधनों की लगातार निगरानी की जाएगी। किसी सिस्टम में संदिग्ध गतिविधि, साइबर हमले या डेटा चोरी का पता चलने पर उसकी पहचान कर जरूरी कार्रवाई की जा सकेगी। इसका मकसद सरकारी डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित रखना व साइबर खतरों से निपटने की व्यवस्था मजबूत करना है।

तीन साल तक तकनीकी सहायता देगा आईआईटी कानपुर का C3iHub

UP-CSOC की स्थापना के लिए C3iHub को कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नामित किया जाना प्रस्तावित है। एजेंसी केंद्र स्थापित करने के साथ शुरुआती तीन वर्षों तक इसका संचालन, रखरखाव, निगरानी व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी। साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं पर कार्रवाई की जिम्मेदारी भी इसी व्यवस्था के तहत निभाई जाएगी। इससे अलग-अलग सरकारी विभागों के डिजिटल सिस्टम की निगरानी एक जगह से हो सकेगी।

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एआई से साइबर हमलों का पहले पता लगाने की कोशिश

AI Based Cyber Threat Detection : सुरक्षा केंद्र में नेक्स्ट जनरेशन फायरवॉल, सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन एंड इवेंट मैनेजमेंट (SIEM), सिक्योरिटी ऑर्केस्ट्रेशन, ऑटोमेशन एंड रिस्पॉन्स (SOAR), नेटवर्क डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स (NDR) जैसी तकनीकें लगाई जाएंगी। इसके साथ वेब एप्लिकेशन फायरवॉल, एपीआई सिक्योरिटी, एंटी-डीडीओएस, एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट व डीएनएस सिक्योरिटी की व्यवस्था भी होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग व थ्रेट इंटेलिजेंस की मदद से संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण किया जाएगा। इससे रैनसमवेयर हमलों, डेटा चोरी व बिना अनुमति सिस्टम तक पहुंचने जैसी घटनाओं का पता लगाने में मदद मिलेगी।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ संभालेंगे निगरानी का काम

केंद्र में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम तैनात की जाएगी। यह टीम हर समय नेटवर्क की निगरानी करने के साथ साइबर घटनाओं पर कार्रवाई व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी। विभिन्न विभागों के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (CISO) व नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय भी किया जाएगा। परियोजना में सिस्टम की कमजोरियों की जांच, संभावित खतरों की तलाश, साइबर ड्रिल व प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इससे सरकारी विभागों को साइबर हमलों से निपटने की तैयारी बेहतर करने में मदद मिलेगी।

हर तीन महीने में होगा स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट

Government Data Protection Uttar Pradesh : साइबर सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच के लिए थर्ड पार्टी सिक्योरिटी ऑडिटर की मदद ली जाएगी। केंद्र के सुरक्षा प्रोटोकॉल, तकनीकी व्यवस्था व तय मानकों के पालन की समीक्षा हर तीन महीने में कराई जाएगी। स्वतंत्र ऑडिट के जरिए यह जांचा जाएगा कि सुरक्षा से जुड़े तय नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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