UP Startup Ecosystem : 24 हजार से अधिक स्टार्टअप, 38 करोड़ रुपये से ज्यादा की मिली आर्थिक मदद
योगी सरकार की स्टार्टअप नीति से उद्यमिता को नई रफ्तार, डीप-टेक और AI पर विशेष फोकस, 11 हजार से अधिक महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप भी बने प्रदेश की पहचान

लखनऊ, 30 अक्टूबर 2026:
उत्तर प्रदेश अब नौकरी तलाशने वाले युवाओं के बजाय रोजगार देने वाले उद्यमियों का प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। योगी सरकार की नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहन और संस्थागत सहयोग का असर है कि प्रदेश देश के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभरा है। भारत सरकार के पास पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या 24 हजार से अधिक हो चुकी है, जबकि 3,500 से ज्यादा स्टार्टअप ‘स्टार्ट-इन-यूपी’ के तहत पंजीकृत हैं। खास बात यह है कि प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में 11 हजार से अधिक महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।
स्टार्टअप नीति से उद्यमिता को मिला संस्थागत आधार
प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 15 जुलाई 2020 को उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति अधिसूचित की थी। इसके तहत 10 हजार स्टार्टअप तैयार करने और कम से कम 100 इन्क्यूबेटर्स का नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया। युवाओं की बढ़ती भागीदारी और तकनीकी बदलावों को देखते हुए 9 नवंबर 2022 को नीति में पहला संशोधन किया गया। इसके बाद 10 जुलाई 2026 को नई स्टार्टअप नीति-2026 अधिसूचित कर उद्यमिता को और विस्तार देने की पहल की गई।
AI और डीप-टेक पर सरकार का खास फोकस
सरकार अब स्टार्टअप की संख्या बढ़ाने के साथ अत्याधुनिक तकनीक और अनुसंधान आधारित उद्यमों को भी प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए आठ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें एसजीपीजीआई में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ टेक्नोलॉजी और आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सेंटर संचालित है। इसके अलावा AI एवं मशीन लर्निंग, मेडिटेक, ड्रोन, 5जी/6जी, ब्लॉकचेन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सात अन्य सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी दी गई है।
प्रदेश के डीप-टेक इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए नोएडा और लखनऊ में यू-हब (डीप-टेक हब) विकसित किए जाएंगे। वहीं, स्टार्टअप गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना के प्रस्ताव को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है।
स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को 38.34 करोड़ की मदद
योगी सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के तहत अब तक स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को कुल 38.34 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। इसमें 150 स्टार्टअप्स को भरण-पोषण भत्ता, 440 को सीड कैपिटल एवं मार्केटिंग सहायता और 111 को प्रोटोटाइप विकास के लिए अनुदान मिला है। इसके अलावा 59 इन्क्यूबेटर्स को परिचालन व्यय और 16 को पूंजीगत अनुदान दिया गया है।
गत 27 अगस्त को आयोजित उत्तर प्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक और नौ इन्क्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए। इसी दौरान यूपी स्टार्टअप मिशन वेबसाइट भी लॉन्च की गई।
88 इन्क्यूबेटर्स दे रहे नए उद्यमों को संबल
वर्तमान में प्रदेश में 88 सरकारी मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स कार्यरत हैं। ये कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, फिनटेक और सूचना प्रौद्योगिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में नए उद्यमों को मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग दे रहे हैं। प्रदेश के 48 स्टार्टअप्स को सिडबी से भी वित्तपोषण मिल रहा है। डीपीआईआईटी की वार्षिक स्टार्टअप रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को ‘टॉप परफॉर्मर’ श्रेणी मिलना इस प्रगति का प्रमाण है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर नवाचार, डीप-टेक और उद्यमशीलता के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।






