Ayodhya Deepotsav : सरयू घाटों पर गूंज रहा रामयंत्र, धुन से खिंचे चले आ रहे श्रद्धालु, आस्था से संवर रही आजीविका
50 रुपये में बिक रहा रामयंत्र, रामभक्ति के गीतों के साथ पर्यटकों को लुभा रहे छोटे विक्रेता, आम दिनों में 800 से 1000 रुपये कमाने वाले दीपोत्सव में कमा रहे 2500 रुपये तक

अयोध्या/लखनऊ, 7 नवंबर 2026:
रामनगरी अयोध्या में मां सरयू के घाट दीपों की रोशनी और रामनाम की गूंज से जगमगा रहे हैं। इसी भक्तिमय माहौल में रामयंत्र की मधुर धुन भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। गले में रामयंत्र टांगे और दोनों हाथों से उसकी ताल बजाते विक्रेता घाटों पर आने वाले लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। रामभक्ति के गीतों के साथ गूंजती इसकी धुन सुनकर देश के साथ विदेशी पर्यटक भी ठहरने को मजबूर हो रहे हैं। कोई इसकी धुन का आनंद ले रहा है तो कोई रामभक्ति की इस निशानी को खरीदकर अपने साथ ले जा रहा है।
दीपोत्सव आस्था के साथ आजीविका बढ़ाने का भी अवसर
महज 50 रुपये में एक जोड़ा रामयंत्र बेचने वाले इन छोटे कारोबारियों के लिए दीपोत्सव आस्था के साथ आजीविका बढ़ाने का भी अवसर बनकर आया है। गोरखपुर के सचींद्रनाथ सरयू घाट पर रामयंत्र बेचते हैं। वह बताते हैं कि आम दिनों में रोजाना 800 से 1000 रुपये तक की कमाई हो जाती है लेकिन दीपोत्सव के दौरान यह बढ़कर 1800 से 2500 रुपये तक पहुंच रही है। उनके लिए यह सिर्फ कारोबार नहीं बल्कि रामभक्ति से जुड़ने का माध्यम भी है।
सचींद्रनाथ रामयंत्र बेचने के साथ रामभक्ति के गीत भी गाते हैं। उनकी आवाज और रामयंत्र की ताल सुनकर श्रद्धालु रुकते हैं और इसे खरीदते हैं। दीपोत्सव में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ का सीधा फायदा उनके कारोबार को मिल रहा है। श्रद्धालुओं के लिए रामयंत्र जहां रामनगरी की यात्रा की यादगार बन रहा है वहीं विक्रेताओं के परिवारों की आजीविका का सहारा भी है।
बिहार के राजेंद्र महतुर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह पिछले तीन वर्षों से अयोध्या में रामयंत्र बेच रहे हैं। आम दिनों में करीब 800 रुपये रोजाना कमाने वाले राजेंद्र की आय दीपोत्सव में बढ़कर 2000 रुपये तक पहुंच रही है। वह बताते हैं, ‘राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में लोगों का आना बढ़ा है। रामयंत्र की धुन सुनकर लोग रुकते हैं और खरीदते हैं। इससे हमारा रोजगार भी अच्छा चल रहा है और रामभक्ति से जुड़े रहने का अवसर भी मिलता है।’ पहले दूसरे कामों में लगे राजेंद्र अब इसी कारोबार से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में बढ़ा धार्मिक पर्यटन छोटे कारोबारियों के लिए भी नए अवसर लेकर आया है। रामनगरी के विकास तथा दीपोत्सव जैसे आयोजनों ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को नई गति दी है। इसका असर सरयू घाटों पर छोटे विक्रेताओं की कमाई में भी साफ दिखाई दे रहा है।
रामयंत्र की गूंज अब सरयू घाटों पर केवल भक्ति और परंपरा की पहचान नहीं अपितु बदलती अयोध्या में रोजगार के नए अवसरों की भी कहानी सुना रही है। श्रद्धालु यहां से रामभक्ति की यादगार लेकर लौट रहे हैं तो विक्रेता इसी धुन के सहारे अपने परिवार की खुशहाली की उम्मीद संजो रहे हैं।






