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जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने बताई प्रभु के स्मरण की ताकत…अवधी में सुनाई कजरी

श्रीराम कथा के पांचवें दिन अवधी कजरी से भावविभोर हुए श्रद्धालु, लक्ष्मण टीला पर मंदिर का उल्लेख कर कहा निर्माण के बाद ही लखनऊ में कहूंगा रामकथा

लखनऊ, 5 जून 2026:

सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के पांचवें दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भगवान के निरंतर स्मरण की महिमा बताते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा निषेध भगवान को भूल जाना है और सबसे बड़ी विधि उनका स्मरण करना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे दिन-रात प्रभु का चिंतन करें और जीवन के प्रत्येक क्षण में ईश्वर को याद रखें।

कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने अपने सहज और भावपूर्ण अंदाज में भक्ति, साधना और प्रभु स्मरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम और उनका स्मरण ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। जो व्यक्ति प्रभु को अपने हृदय में बसाकर रखता है, उसके जीवन की अनेक कठिनाइयां स्वतः दूर हो जाती हैं।

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कथावाचन के बीच उन्होंने लखनऊ के ऐतिहासिक लक्ष्मण टीला का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब लक्ष्मण टीला पर लखन महाराज का भव्य मंदिर बन जाएगा, तब वह अगली श्रीराम कथा लखनऊ में कहेंगे। उनके इस वक्तव्य पर पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने जोरदार तालियों से स्वागत किया।

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कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब जगद्गुरु ने अवधी भाषा में कजरी प्रस्तुत की। जैसे ही उन्होंने ‘भूलत नाहीं मधुर मुसकनिया’ गुनगुनाना शुरू किया, पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। श्रद्धालु तालियों की लय के साथ उनकी प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। अवधी की मिठास और भक्ति भाव से ओतप्रोत कजरी ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।

उधर, देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शुक्रवार को लखनऊ पहुंच गए। उनका श्रीराम कथा में शामिल होने का कार्यक्रम है। रक्षा मंत्री के आगमन को देखते हुए कथा स्थल और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में श्रद्धालुओं की आवाजाही पर विशेष नजर रखी गई।

नौ दिवसीय इस संगीतमय श्रीराम कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा स्थल पर भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक वातावरण का संगम देखने को मिल रहा है, जिससे श्रद्धालु धर्म और अध्यात्म के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं।

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