
वाराणसी, 18 अगस्त 2026:
यूपी के वाराणसी जिले में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को नदी का पानी घाटों की सीढ़ियों तक पहुंच गया। जलस्तर बढ़ने से एक घाट से दूसरे घाट तक जाने वाले रास्ते बंद हो गए हैं। शहर के 84 घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। कई घाटों पर स्नान के लिए बने स्थान पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। वहीं सीढ़ियों के पास या छत पर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। गंगा आरती स्थल भी बदल दिया गया है। कई छोटे-बड़े मंदिर सैकड़ों दुकानें पानी के घेरे में आ गईं हैं। लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने से मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है। कई जगह लोगों की आवाजाही रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। नदी में तेज बहाव के चलते नाव संचालन भी बंद कर दिया गया है।

हरिश्चंद्र घाट पर सीढ़ियों के पास अंतिम संस्कार
गंगा का पानी हरिश्चंद्र घाट की सीढ़ियों तक पहुंचने से अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध जगह कम हो गई है। लोगों को नंबर लगाना पड़ रहा है। यहां अब सीढ़ियों के पास उपलब्ध स्थान पर शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। पानी बढ़ने के कारण घाट पर आने वाले लोगों को भी फिसलन व तेज बहाव के बीच सावधानी बरतनी पड़ रही है। मणिकर्णिका घाट पर भी जलस्तर बढ़ने का असर पड़ा है। घाट के निचले हिस्से में पानी भरने से अंतिम संस्कार की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हुई है। यदि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो अंतिम संस्कार के लिए जगह की समस्या बढ़ सकती है।

84 घाटों का आपसी संपर्क बंद, रास्तों पर भरा पानी
गंगा के पानी ने कई घाटों के बीच बने रास्तों को अपनी चपेट में ले लिया है। इसके चलते 84 घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। अब लोग एक घाट से दूसरे घाट तक सामान्य रास्ते से नहीं जा पा रहे हैं। कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। संत रविदास घाट व नया सामने घाट के स्नान स्थल भी पानी में डूब गए हैं। अस्सी घाट पर गंगा का पानी आरती स्थल के नीचे तक पहुंच गया है। घाट किनारे बने कई मंदिरों के आसपास भी पानी जमा हो गया है।
दशाश्वमेध पर छत से कराई गई गंगा आरती
दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि की प्रसिद्ध गंगा आरती का स्थान जलस्तर बढ़ने के चलते बदलना पड़ा है। मंगलवार को आरती घाट के बजाय छत पर कराई गई। गंगा का पानी बढ़ने के बाद आरती स्थल को पांचवीं बार बदला गया है। जब तक गंगा का जलस्तर सामान्य नहीं होता, तब तक आरती छत पर ही कराई जाएगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए घाट पर भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है।

नमो घाट के प्लेटफॉर्म तक पहुंचा पानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर नमो घाट पर भी दिखाई दे रहा है। पानी नमो घाट के प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुका है। प्रशासन ने यहां एहतियातन बैरिकेडिंग कर दी है। पुलिसकर्मी लोगों को नदी के करीब जाने से रोक रहे हैं। सावन के चलते काशी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बनी हुई है। बड़ी संख्या में कांवरिए भी पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन ने घाटों पर निगरानी बढ़ा दी है। लोगों को पानी में उतरने से रोकने के लिए पुलिस लगातार मौके पर मौजूद है।

66.64 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर
मंगलवार सुबह 6 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 66.64 मीटर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में वाराणसी में 46.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई है। मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक अगले 24 घंटे तक मौसम का मिजाज इसी तरह बने रहने की संभावना है। सोमवार रात गंगा के जलस्तर में करीब 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हुई थी। बाद में पानी बढ़ने की रफ्तार करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे रह गई। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक अगले 24 घंटे में गंगा का जलस्तर फिर बढ़ सकता है।
वरुणा में भी शुरू हुआ पलट प्रवाह, घाटों पर NDRF की लगातार निगरानी
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ वरुणा नदी में पलट प्रवाह शुरू हो गया है। इसके चलते वरुणा किनारे बसे इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। शहर के एक दर्जन से ज्यादा मोहल्लों में पानी पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। गंगा में तेज बहाव को देखते हुए NDRF की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। जल पुलिस के जवान भी घाटों पर तैनात हैं। टीमें लोगों को नदी में जाने से रोक रही हैं। संवेदनशील घाटों पर लगातार निगरानी की जा रही है।
नाव संचालन बंद होने के बाद नदी में आवाजाही पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है। घाटों पर बैरिकेडिंग के जरिए लोगों को पानी के करीब जाने से रोका गया है। प्रशासन तटवर्ती इलाकों में भी जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।

बारिश जारी रहने पर और बढ़ सकती है मुश्किल
वाराणसी में पिछले 24 घंटे के दौरान 46.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने के बाद गंगा का जलस्तर बढ़ा है। मौसम विभाग से जुड़े वैज्ञानिकों ने अगले 24 घंटे तक मौसम का मिजाज इसी तरह रहने की संभावना जताई है। केंद्रीय जल आयोग ने भी गंगा के जलस्तर में अगले 24 घंटे के दौरान बढ़ोतरी की संभावना बताई है। ऐसे में घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। प्रशासन की नजर गंगा के साथ वरुणा नदी के जलस्तर पर भी बनी हुई है।






