
योगेंद्र मलिक
देहरादून, 5 सितंबर 2026ः
शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित लोक भवन में शनिवार को शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार समारोह का आयोजन हुआ। समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने 19 शिक्षकों को सम्मानित किया। राज्यपाल ने सभी शिक्षकों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक केवल एक पेशे से जुड़ा व्यक्ति नहीं, बल्कि पीढ़ियों को दिशा देने वाला और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने वाला मार्गदर्शक होता है। कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि उनमें संस्कार विकसित करता है, उनकी प्रतिभा को पहचानता है और उन्हें जीवन की सही दिशा दिखाता है।
राज्यपाल ने कहा कि हजारों शिक्षकों के बीच चयनित होकर यह सम्मान प्राप्त करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि शिक्षक की सफलता केवल विद्यार्थियों के अच्छे अंक प्राप्त करने से तय नहीं होती। वास्तविक सफलता तब है, जब किसी सामान्य परिवार का बच्चा आगे बढ़कर देश की पहचान बने और यह महसूस करे कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने का विश्वास उसे अपने गुरु से मिला। कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानना, उसमें आत्मविश्वास जगाना और आगे बढ़ने का साहस देना शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। राज्यपाल ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को विषयगत ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला, ज्ञान के साथ संस्कार, सफलता के साथ संवेदनशीलता और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का भाव भी सिखाएं।

गुरमीत सिंह ने शैलेश मटियानी के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि संवेदनशील कथाकार ने पहाड़ के सामान्य जन के जीवन, संघर्ष और संवेदनाओं को अपनी लेखनी के माध्यम से सशक्त स्वर दिया। उनके नाम पर दिया जाने वाला यह पुरस्कार शिक्षकों के समर्पण, संघर्ष, संवेदनशीलता और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का सम्मान है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, समझने, प्रश्न करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है। भविष्य की शिक्षा में तकनीक की शक्ति और शिक्षक की संवेदना का समन्वय जरूरी है। तकनीक सीखने के नए अवसर दे सकती है, लेकिन उनका सही दिशा में उपयोग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी शिक्षक की ही होगी।
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को आधुनिक ज्ञान के साथ अपनी जड़ों से जोड़ना भी शिक्षकों का महत्वपूर्ण दायित्व है। लोक संस्कृति, पर्यावरण, परंपराएं और हिमालयी जीवन-पद्धति हमारी अमूल्य विरासत हैं। आधुनिक शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना का समन्वय बच्चों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील और संतुलित व्यक्तित्व प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां बच्चा भय से नहीं, बल्कि उत्साह से आए और प्रश्न पूछना कमजोरी नहीं, सीखने की शुरुआत माना जाए।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि करीब 70 हजार शिक्षकों में से 19 शिक्षकों का चयन चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने सभी चयनित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके उत्कृष्ट कार्य और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि शैलेश मटियानी ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की। प्रदेश के विद्यालयी पुस्तकालयों में उनकी प्रमुख कृतियां उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि विद्यार्थी उनके साहित्य से परिचित हो सकें और उत्तराखंड की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकें। समारोह में अपर सचिव राज्यपाल रीना जोशी, अपर सचिव शिक्षा नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे सहित संबंधित विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।





