
लखनऊ, 21 अगस्त 2026:
यूपी और जापान के रिश्ते अब निवेश और उद्योग से आगे बढ़कर हेल्थकेयर और मानव संसाधन की नई साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘यूपी-जापान हेल्थकेयर एंड केयर इकॉनामी पार्टनरशिप’ के सेक्टोरल सेशन में दोनों पक्षों ने मेडिकल शिक्षा, रोबोटिक्स, फार्मा, केयरगिविंग और कुशल मानव संसाधन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया।
कार्यक्रम में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि जापान की अत्याधुनिक तकनीक और उत्तर प्रदेश की विशाल युवा शक्ति मिलकर हेल्थकेयर सेक्टर में ऐसा मॉडल तैयार कर सकती है, जिससे दोनों देशों को लाभ होगा। जापान में प्रशिक्षित मानव संसाधन की बढ़ती जरूरत के बीच यूपी के डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल तकनीशियन बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
‘निवेश के लिए तेजी से अनुकूल प्रदेश बन रहा यूपी’
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश निवेश के लिए तेजी से अनुकूल प्रदेश बन रहा है। बेहतर कानून-व्यवस्था, एक्सप्रेसवे, एयर कनेक्टिविटी, बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार इसकी बड़ी ताकत है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 47 से बढ़कर 83 से अधिक हो चुकी है। एमबीबीएस, एमडी, नर्सिंग और पैरामेडिकल सीटों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि जापान की जरूरतों के अनुरूप यूपी के युवाओं को जापानी भाषा और कार्य संस्कृति का प्रशिक्षण देकर उन्हें वहां रोजगार के लिए तैयार किया जा सकता है।
फार्मा क्षेत्र में एक ही दिन 12 कंपनियों के साथ किए गए एमओयू
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष ने हेल्थकेयर में जापानी निवेश की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फार्मा क्षेत्र में एक ही दिन 12 कंपनियों के साथ एमओयू किए गए हैं। जापानी तकनीक को प्रदेश में लाने के साथ रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी पर भी काम किया जा रहा है। करीब 400 एकड़ में मेडिकल टेक पार्क विकसित करने की योजना है। पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में भी जापानी कंपनियों की भागीदारी की संभावनाएं तलाशने की बात कही गई।
जापान की तकनीक और यूपी की युवा शक्ति का मेल खोलेगा विकास के नए रास्ते
व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि जापान की तकनीक और यूपी की युवा शक्ति का मेल विकास के नए रास्ते खोलेगा। वहीं श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार का लक्ष्य निवेश के साथ रोजगार सृजन करना है। ‘हर हाथ को काम’ के संकल्प को देश के साथ विदेशों में रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
विकसित किए जाएंगे मांग आधारित प्रशिक्षण केंद्र
कौशल विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि आईटीआई और पॉलिटेक्निक के व्यापक नेटवर्क के जरिए मांग आधारित प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जा सकते हैं। इनमें जापानी भाषा, तकनीकी कौशल, केयरगिविंग और जापानी कार्य संस्कृति की ट्रेनिंग दी जा सकती है।
श्रम एवं सेवायोजन विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एमके शन्मुगा सुन्दरम ने जापान की वृद्ध होती आबादी और श्रमिकों की कमी को यूपी के युवाओं के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि केयरगिविंग, कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन के जरिए युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार से जोड़ा जा सकता है।
यूपी कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे ने डिमांड बेस्ड ट्रेनिंग, आधुनिक ट्रेड और भाषा प्रशिक्षण को जापानी उद्योगों की जरूरतों से जोड़ने की जरूरत बताई। वहीं स्टेप फाउंडेशन की डायरेक्टर मानसी कसलीवाल ने केयर स्किल्स टेस्ट, जापानी भाषा और नर्सिंग केयर लैंग्वेज आधारित प्रशिक्षण मॉडल पर जोर दिया। सेशन के अंत में जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के औद्योगिक नीति विभाग के महानिदेशक जुइची कोबायाशी समेत जापानी प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। इन्वेस्ट यूपी की विशेष सचिव एवं एसीईओ प्रेरणा शर्मा ने प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए।






