Uttar Pradesh

यूपी का नया फाइनेंशियल फॉर्मूला…टैक्स से सीधे जनता तक पहुंच रहा पैसा

सेक्टरवार प्रयोग तय होने से योजनाओं में आई पारदर्शिता व लोगों का भरोसा भी बढ़ा, जमीन पर दिखने लगा है असर

लखनऊ, 17 मार्च 2026:

उत्तर प्रदेश में सरकारी खर्च का तरीका बदला है। अब टैक्स सिर्फ खजाना भरने का जरिया नहीं रहा, बल्कि उसे सीधे तय कामों से जोड़ा जा रहा है। आसान भाषा में कहें तो किस मद से पैसा आया और कहां खर्च हुआ, यह अब साफ दिखने लगा है। यही वजह है कि आम आदमी भी समझ पा रहा है कि उसका पैसा आखिर लग कहां रहा है।

सरकार ने कोशिश की है कि हर रुपये का इस्तेमाल तय हो। इससे एक तरफ योजनाओं में पारदर्शिता आई है, तो दूसरी तरफ लोगों का भरोसा भी बढ़ रहा है। टैक्स को अब सीधे विकास से जोड़ा गया है, जिससे असर जमीन पर नजर आने लगा है।

गो कल्याण सेस से आवारा पशुओं पर फोकस

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सरकार ने आबकारी राजस्व पर 0.5 फीसदी का गो कल्याण सेस लगाया है। यह पैसा शराब बिक्री से आता है, इसलिए आम लोगों पर इसका बोझ बहुत ज्यादा नहीं पड़ता। लेकिन कुल मिलाकर इससे बड़ी रकम जुट रही है। इस फंड का इस्तेमाल आवारा गोवंश की देखभाल में किया जा रहा है। प्रदेश में बने गो आश्रय स्थलों में पशुओं को रहने, चारा और इलाज की सुविधा दी जा रही है। खेती में मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल से पशुओं की उपयोगिता घटी, जिसके चलते यह समस्या बढ़ी थी। अब इस सेस के जरिए इसे संभालने की कोशिश हो रही है।

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सरकार ने एक और साफ नीति अपनाई है। जिस सेक्टर से राजस्व आता है, उसी सेक्टर में उसे लगाया जा रहा है। इससे योजनाओं का असर सीधा दिख रहा है। रियल एस्टेट से मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी को धार्मिक और पर्यटन प्रोजेक्ट में लगाया जा रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे कामों से पर्यटन बढ़ा है और रोजगार भी पैदा हुआ है।

खनन से मिलने वाली आमदनी गांवों में सिंचाई और पानी के इंतजाम सुधारने में खर्च हो रही है। इससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। एक्सप्रेसवे से मिलने वाला टोल अब गांवों तक सड़क जोड़ने में काम आ रहा है। फीडर रोड बनने से दूर इलाके भी मुख्य सड़कों से जुड़ रहे हैं। मंडी शुल्क को किसान हित वाली योजनाओं और फसल सुरक्षा पर खर्च किया जा रहा है, जिससे खेती को मजबूती मिल रही है।

इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी साफगोई है। अब लोगों को समझ आ रहा है कि कौन सा टैक्स किस काम में लग रहा है। शराब से मिलने वाला पैसा गो कल्याण में, टोल का पैसा सड़क में, प्रॉपर्टी से जुड़ा टैक्स पर्यटन और विरासत में लगाया जा रहा है। इससे सरकार की कार्यशैली पर भरोसा बढ़ा है। पहले जहां यह सवाल रहता था कि पैसा गया कहां, अब जवाब साफ दिख रहा है कि यहीं खर्च हुआ।

राज्य ने 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, खेती, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे सेक्टर पर तेजी से खर्च बढ़ाया जा रहा है। बजट में पूंजीगत खर्च बढ़ने से सड़क, उद्योग और रोजगार तीनों में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि तय प्लान के साथ खर्च करने से विकास की रफ्तार और तेज होगी। यूपी का यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी रास्ता दिखाता है। जो राज्य जिस क्षेत्र में मजबूत है, वहां से मिलने वाले राजस्व को उसी क्षेत्र में लगाकर बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।

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