
वाराणसी, 16 जुलाई 2026:
यूपी के काशी की यातायात व्यवस्था को नई रफ्तार देने वाली एक बड़ी परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने वाराणसी के महत्वाकांक्षी वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। करीब 10,998 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना 43.218 किलोमीटर लंबी होगी। इसका उद्देश्य शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को जोड़ते हुए पूर्वांचल की परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना और रोजाना लगने वाले जाम से लोगों को राहत दिलाना है।
वरुणा नदी के आसपास का क्षेत्र वाराणसी के जनजीवन की महत्वपूर्ण धुरी है लेकिन सकरी सड़कें, पैदल यात्रियों, ई-रिक्शा, निजी वाहनों और भारी मालवाहकों का मिश्रित यातायात यहां अक्सर रफ्तार थाम देता है। नदी पर बने पुलों की सीमित क्षमता भी समस्या को और गंभीर बनाती है। एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए शहर के नीचे की सड़कों का दबाव कम करने की तैयारी है।
परियोजना को दो पैकेज में बांटा गया है। पैकेज-1 में एनएच-31 से फुलवरिया जंक्शन तक 28.498 किलोमीटर लंबा मार्ग बनेगा। इसमें 11.744 किलोमीटर का 6-लेन मुख्य कैरिजवे और 16.754 किलोमीटर के फ्लाईओवर, रैंप, लूप व सर्विस रोड शामिल होंगे। पैकेज-2 में फुलवरिया जंक्शन से काशी रेलवे स्टेशन तक 14.720 किलोमीटर का मार्ग विकसित किया जाएगा। इसमें 7.676 किलोमीटर का 4/6-लेन मुख्य कैरिजवे और 7.044 किलोमीटर के रैंप होंगे।

परियोजना में 15.78 किलोमीटर ग्रीनफील्ड और 3.64 किलोमीटर ब्राउनफील्ड एलाइनमेंट शामिल होगा। एलिवेटेड वायाडक्ट बनने से नीचे की सड़कों पर यातायात का दबाव और अव्यवस्था काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
एयरपोर्ट का सफर 60 मिनट से घटकर 20 मिनट
कॉरिडोर बनने के बाद वाराणसी जंक्शन से लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचने का समय करीब 60 मिनट से घटकर महज 20 मिनट रह जाएगा। यानी यात्रियों को हर सफर में लगभग 40 मिनट की बचत होगी। इससे स्थानीय लोगों के साथ कारोबारियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी।
2044 तक के ट्रैफिक को ध्यान में रखकर डिजाइन
यह परियोजना केवल आज के जाम का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। अनुमान है कि वर्ष 2044 तक इस कॉरिडोर पर यातायात भार प्रतिदिन 59,000 पीसीयू से अधिक हो जाएगा। इसी को देखते हुए 4 से 6 लेन की एलिवेटेड संरचना तैयार की जा रही है, ताकि काशी को आने वाले वर्षों में तेज, सुगम और जाम से राहत वाली परिवहन व्यवस्था मिल सके।






