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बुद्ध की धरती से जापान तक यूपी की उड़ान, यामानाशी बनेगा पर्यटन का नया गेटवे

योगी सरकार की नई पहल से बढ़ेगी जापानी पर्यटकों की आवाजाही, यूपी और यामानाशी के बीच एमओयू, सारनाथ-कुशीनगर समेत बौद्ध स्थलों को वैश्विक पर्यटन बाजार से जोड़ने की तैयारी

लखनऊ, 21 अगस्त 2026:

यूपी अब भगवान बुद्ध की धरती को जापान से जोड़कर अपने बौद्ध पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी में है। जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर को यूपी पर्यटन के लिए नए अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के तौर पर विकसित करने की दिशा में शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया गया। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश सरकार और जापान के यामानाशी के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुए संवाद में बौद्ध, आध्यात्मिक और वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने पर मंथन हुआ। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच पर्यटन सहयोग के लिए एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए।

यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी और डिप्टी-गवर्नर जुनिची इशिदेरा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यामानाशी जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश के बौद्ध और आध्यात्मिक स्थलों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा यामानाशी को जापान में यूपी पर्यटन के लिए मजबूत प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की है।

बौद्ध सर्किट को मिलेगा ग्लोबल कनेक्शन

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जयवीर सिंह ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बौद्ध पर्यटन की तस्वीर बदली है। सरकार का जोर अब केवल स्मारकों के विकास पर नहीं अपितु कनेक्टिविटी, पर्यटक सुविधाओं, ठहरने की व्यवस्था और बेहतर पर्यटन अनुभव पर भी है। सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशाम्बी और संकिसा जैसे प्रमुख स्थल भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।

सरकार अब इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। जापान को इस अभियान में इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत और जापान के बीच भगवान बुद्ध की विरासत सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्ते की मजबूत कड़ी है।

पर्यटन के साथ निवेश का भी खुलेगा रास्ता

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि उत्तर प्रदेश अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और मजबूत होते इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बन रहा है। हाईवे, नागरिक उड्डयन, उद्योग और निवेश के क्षेत्र में हुई प्रगति का लाभ पर्यटन को भी मिल रहा है।

उन्होंने जापानी निवेशकों से यूपी के पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने और नए पर्यटन उत्पाद व अनुभव विकसित करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि प्रदेश में भगवान बुद्ध से जुड़े छह प्रमुख स्थल जापानी पर्यटकों को आध्यात्मिक शांति के साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ सकते हैं।

एमओयू से पर्यटन सहयोग को मिलेगी रफ्तार

उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच हुए एमओयू में ज्ञान और अनुभवों के आदान-प्रदान, संयुक्त प्रचार अभियान, पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के बीच संपर्क, धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन मार्गों के विकास और दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने पर सहमति बनी है।

एमओयू में बौद्ध, आध्यात्मिक और वेलनेस पर्यटन को विशेष महत्व दिया गया है। प्रदर्शनियों, सेमिनार और डिजिटल सामग्री के जरिए दोनों क्षेत्रों के पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने की योजना है। इसके अलावा सारनाथ और जापान के फुजिसान से जुड़े यूनेस्को विश्व धरोहर मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। भविष्य में बहुभाषी पर्यटक सुविधाओं, ध्यान एवं वेलनेस पर्यटन, आतिथ्य, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पेशेवर प्रशिक्षण और ज्ञान हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की तैयारी है।

बौद्ध पर्यटन में तेजी, आंकड़े दे रहे गवाही

उत्तर प्रदेश में बौद्ध पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है। प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थलों पर वर्ष 2022 में 22.4 लाख पर्यटक पहुंचे थे। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 81.8 लाख से अधिक हो गई। विदेशी पर्यटकों की संख्या भी इसी अवधि में 48 हजार से बढ़कर करीब 4.43 लाख पहुंच गई। वर्ष 2026 में जनवरी से जून के बीच ही प्रमुख बौद्ध स्थलों पर 30.07 लाख पर्यटक पहुंच चुके हैं जिनमें 2.02 लाख विदेशी पर्यटक शामिल हैं। सरकार अब इसी बढ़ती रुचि को जापानी पर्यटकों के बड़े बाजार से जोड़ने की तैयारी में है।

जापानी पर्यटकों के हिसाब से बदलेगा आतिथ्य

संवाद में जापानी पर्यटकों की पसंद और जरूरतों के मुताबिक होटल और पर्यटन सुविधाएं विकसित करने पर भी चर्चा हुई। समयबद्ध और भरोसेमंद सेवाओं के साथ जापानी खान-पान को भी महत्वपूर्ण माना गया। श्रावस्ती और कुशीनगर में संचालित कुछ होटलों में जापानी पर्यटकों की सुविधा के लिए जापानी भोजन की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई।

वहीं पर्यटन विशेषज्ञों ने दोनों देशों के बीच युवा पर्यटकों और स्कूल समूहों की आवाजाही बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। जापान की चेरी ब्लॉसम, माउंट फूजी और आधुनिक पर्यटन संस्कृति जहां भारतीय पर्यटकों को आकर्षित कर रही है वहीं यूपी की आध्यात्मिकता, इतिहास, खान-पान और आतिथ्य जापानी पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण बन सकते हैं।

218 करोड़ से बौद्ध स्थलों का विकास

विशेष सचिव एवं पर्यटन निदेशक मृदुल चौधरी ने बताया कि राज्य योजना के तहत बौद्ध स्थलों पर 51 पर्यटन परियोजनाओं में 218 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। सारनाथ और कुशीनगर में विश्व बैंक की सहायता से एकीकृत पर्यटन विकास की योजना पर काम चल रहा है, जबकि श्रावस्ती में एसएएससीआई के तहत बड़े विकास कार्य प्रस्तावित हैं। सरकार की कोशिश है कि पर्यटक बौद्ध सर्किट के अलग-अलग स्थलों को अलग-अलग यात्राओं के रूप में नहीं, बल्कि एक संपूर्ण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा के रूप में अनुभव करें।

अब जापानी प्रतिनिधिमंडल का काशी-सारनाथ का दौरा

लखनऊ में संवाद और एमओयू के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल वाराणसी और सारनाथ का दौरा करेगा। काशी की आध्यात्मिक परंपरा, गंगा आरती और सारनाथ की बौद्ध विरासत जापानी मेहमानों को भारत-जापान के सदियों पुराने रिश्ते की झलक दिखाएगी। आगरा के ताजमहल और ब्रज की सांस्कृतिक परंपराओं से लेकर लखनऊ के पर्यटन और उद्योग संवाद तक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा यूपी की विविध पर्यटन क्षमता को सामने रखने की रणनीति का हिस्सा है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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