
प्रमोद कुमार
मलिहाबाद (लखनऊ), 22 अगस्त 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के काकोरी कस्बा स्थित शीतला माता मंदिर में जीर्णोद्धार के भूमि पूजन के दौरान भाजपा की दलित विधायक जय देवी कौशल के साथ कथित जातिगत भेदभाव का मामला अब मंदिर की चौखट से निकलकर सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। विधायक के आरोपों के बाद विपक्ष ने इसे सरकार के सामने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की तो भाजपा ने भी तत्काल डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी।

प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, विधायक के पति एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर, बीकेटी विधायक योगेश शुक्ला समेत भाजपा के कई नेता शुक्रवार शाम शीतला देवी मंदिर पहुंचे। विधायक जय देवी कौशल के नेतृत्व में सर्वसमाज के लोगों ने संध्या आरती में हिस्सा लिया। इस दौरान समानता, समरसता और सामाजिक सद्भाव की ज्योति प्रज्वलित कर भेदभाव मुक्त समाज का संकल्प लिया गया।
मंत्री असीम अरुण ने मामले को संभालने की कोशिश करते हुए कहा कि विधायक को जो पीड़ा हुई, वह स्पष्ट है। संभव है कि घटना जानबूझकर न हुई हो लेकिन जो हुआ वह गलत हुआ। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी गलती भविष्य में किसी के साथ नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, खुद विधायक जय देवी कौशल के तेवर नरम नहीं पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के इशारे पर उनके साथ भेदभाव हुआ, वही अब सोशल मीडिया पर मलिहाबाद के महदोईया स्थित भुइयां देवी मंदिर की तस्वीरें डालकर उन्हें झूठा साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। विधायक का कहना है कि शीतला मंदिर में उन्हें ईंट छूने, रोली लगाने और आरती में शामिल होने तक का अवसर नहीं दिया गया।

जय देवी ने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम के पीछे काकोरी के एक बड़े व्यक्ति का इशारा था। हालांकि उन्होंने मंदिर के पुजारी को दोषी नहीं ठहराया और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को जिम्मेदार बताया। इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के संबोधन के दौरान स्थानीय लोगों ने मौजूदा मंदिर प्रबंधन समिति को भंग कर नए सिरे से गठन की मांग उठा दी। लोगों का कहना था कि नई समिति में सर्वसमाज के लोगों को शामिल किया जाए जिससे किसी व्यक्ति विशेष का वर्चस्व खत्म हो और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
मालूम हो कि बुधवार को पर्यटन विभाग से मंजूर करीब एक करोड़ रुपये की लागत वाले जीर्णोद्धार कार्य के भूमि पूजन में विधायक पहुंची थीं। उन्होंने भेदभाव के आरोप लगाए जबकि मंदिर प्रबंधक रमाकांत गुप्ता और पुजारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर सभी जातियों के लिए खुला है। किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ।
अब सवाल सिर्फ मंदिर में हुए घटनाक्रम का नहीं बल्कि यह भी है कि भाजपा इस विवाद को सामाजिक समरसता के संदेश के साथ कितनी जल्दी शांत कर पाती है। क्योंकि विपक्ष को जहां जातीय राजनीति का मुद्दा मिल गया है वहीं भाजपा के लिए अपने ही दलित विधायक की नाराजगी को दूर करना भी बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गई है।






