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Apple Manager विवेक तिवारी हत्याकांड : 8 साल बाद बर्खास्त सिपाही प्रशांत को 10 साल की कैद

लखनऊ के बहुचर्चित हत्याकांड में कोर्ट का फैसला, आरोपी पर हत्या नहीं, गैर इरादतन हत्या का दोष, 20 हजार जुर्माना भी, सहकर्मी को घर छोड़ने जा रहे विवेक को पुलिसकर्मी ने मारी थी गोली, दूसरे आरोपी सिपाही संदीप को पहले ही किया जा चुका है बरी

लखनऊ, 21 सितंबर 2026:

आठ साल पहले लखनऊ में हुए बहुचर्चित Apple के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में सोमवार को अदालत ने सजा का ऐलान कर दिया। जिला एवं सत्र न्यायालय ने बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। मामले में दूसरे आरोपी सिपाही संदीप को अदालत साक्ष्यों के अभाव में पहले ही बरी कर चुकी है।

यह मामला सितंबर 2018 में सामने आने के बाद पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। 29 सितंबर 2018 की देर रात Apple के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान को कार से उनके घर छोड़ने जा रहे थे। गोमतीनगर विस्तार क्षेत्र में मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास गश्त कर रहे सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया।

आरोप था कि कार नहीं रुकने पर बाइक सवार दोनों पुलिसकर्मियों ने ओवरटेक कर विवेक को रोका और इसी दौरान प्रशांत ने गोली चला दी। गोली लगने से विवेक तिवारी की मौत हो गई। घटना के बाद गोमतीनगर थाने में दोनों सिपाहियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।
करीब आठ साल चले ट्रायल के बाद मामले में अदालत का फैसला आया। 22 मार्च 2019 को प्रशांत के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।

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इस केस में अभियोजन ने आठ गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों समेत सफाई में आठ साक्ष्य प्रस्तुत किए। 26 नवंबर 2024 को दोनों आरोपियों के बयान दर्ज किए गए। मामले में अंतिम बहस 6 अगस्त 2026 को पूरी हुई। इसके बाद 17 सितंबर को अदालत ने प्रशांत चौधरी को दोषी करार दिया, जबकि सजा पर फैसला 21 सितंबर के लिए सुरक्षित किया गया था।

फैसले के दौरान विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी और उनके परिजन अदालत में मौजूद नहीं थे। गैर इरादतन हत्या में दोषसिद्धि के बाद कल्पना तिवारी ने फैसले पर असंतोष जताते हुए कहा था कि वह अदालत से न्याय की उम्मीद कर रही थीं लेकिन फैसला उनकी अपेक्षा के अनुरूप नहीं आया। उन्होंने सवाल उठाया था कि प्रशिक्षित पुलिसकर्मी द्वारा गोली चलाने की घटना को महज गलती कैसे माना जा सकता है। कल्पना ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात भी कही थी।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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