‘भारत पर्व’ में मोदी ने सराहा देवभूमि का हुनर, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच चमका उत्तराखंड टूरिज्म का स्टॉल
गुजरात के एकता नगर में आयोजित कार्यक्रम में पीएम ने राज्यों के प्रदर्शनी स्टॉलों को देखा, पर्यटन विभाग बना आकर्षण का केंद्र, देवभूमि की सांस्कृतिक प्रस्तुति को देखकर हुए गदगद

राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 1 नवंबर 2026ः
गुजरात के एकता नगर (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर) में आयोजित ‘भारत पर्व 2026’ और ‘एकता प्रकाश पर्व’ में उत्तराखंड पर्यटन विभाग का स्टॉल आकर्षण का केंद्र बना। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न राज्यों के प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और देश की बहुविध सांस्कृतिक संपदा का जायजा लिया। इस दौरान मोदी उत्तराखंड के स्टॉल पर पहुंचे तो कुमाऊं के प्रसिद्ध पारंपरिक ‘छोलिया नृत्य’ की ओजस्वी थाप, रणसिंघा और ढोल-दमाऊ की गूंज के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों की इस युद्ध नृत्य शैली और देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुति को देखकर प्रधानमंत्री बेहद अभिभूत नजर आए।
प्रदेश के बदलते पर्यटन परिदृश्य को मंच पर दिखाया
पीएम मोदी ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल और विभागीय प्रयासों की खुलकर सराहना की। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करते हुए उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने देवभूमि की धार्मिक विरासत के साथ-साथ बदलते पर्यटन परिदृश्य को राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उभारा। स्टॉल पर चारधाम यात्रा के अलावा राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी होमस्टे योजना, रिवर राफ्टिंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और ‘ट्रेक ऑफ द ईयर’ जैसी साहसिक पर्यटन पहलों की जानकारी सुसज्जित साहित्य व डिजिटल माध्यमों से प्रदान की गई।

स्टॉल पर दिखा ‘वोकल फॉर लोकल’ का आकर्षण
प्रधानमंत्री की यात्रा और देश-विदेश से आए अतिथियों के बीच उत्तराखंड के स्थानीय एवं जैविक उत्पाद विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहे। उत्तराखंड के स्टॉल पर राज्य के मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मडुआ (रागी) व झंगोरा के बिस्कुट, मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा, गहत-भट्ट की पहाड़ी दालें, शुद्ध हिमालयी शहद और बुरांश का जूस प्रदर्शित किया गया। वहीं, उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक कला ‘एपण’ (Aipan Art) से सजे स्मृति चिह्न, वॉल हैंगिंग, अल्मोड़ा का तामटा (तांबा) शिल्प और बद्री-केदार धाम की काष्ठ कला पर आधारित नक्काशीदार प्रतिकृतियां छाई रहीं।
उच्च हिमालयी भोटिया जनजातीय बुनकरों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित ऊनी शॉल, कालीन और पंखी की गुणवत्ता को भी आगंतुकों ने जमकर सराहा। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के इस एकीकृत और प्रभावी प्रदर्शन ने न केवल राज्य के पर्यटन को एक नई दिशा देने का कार्य किया है, बल्कि इससे उत्तराखंड के ग्रामीण व जनजातीय कारीगरों, बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा बाजार और नई पहचान भी हासिल हुई है।






