गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव : भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता, धामी बोले- गोरखा समाज भारत का गौरव
राजकीय मेला 2026 में पहुंचे सीएम, लोगों को दीं शुभकामनाएं, कहा- गोरखा समाज की भाषा, संस्कृति व परंपराओं के संरक्षण पर सरकार का पूरा फोकस, सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी व आधारभूत सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता

देहरादून, 2 नवंबर 2026ः
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून के गढ़ी कैंट के महिंद्रा ग्राउंड में आयोजित गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेला 2026 में पहुंचे। सीएम ने गोरखा समाज के लोगों को दशैं एवं दीपावली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह महोत्सव गोरखा समाज की गौरवशाली संस्कृति, समृद्ध परंपराओं और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दशैं का पर्व मां दुर्गा की आराधना के साथ अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है, जबकि दीपावली अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक है।
समाज का इतिहास गौरवशाली गाथाओं से भरा हुआ
धामी ने कहा कि ये दोनों पर्व समाज को सत्य, न्याय, सदाचार, प्रेम और आपसी सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी विरासत को संरक्षित रखने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए वीर गोरखा कल्याण समिति के पदाधिकारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस समाज का इतिहास अदम्य शौर्य, त्याग और बलिदान की गौरवशाली गाथाओं से भरा हुआ है। गोरखा समाज केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत का गौरव है। देश की सीमाओं की रक्षा में गोरखा वीरों ने सदैव अद्वितीय साहस, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि गोरखा समाज का आदर्श वाक्य ‘कायर हुनुभन्दा मर्नु राम्रो’ अर्थात कायर बनकर जीने से बेहतर वीरता के साथ प्राण न्योछावर करना, उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान की भावना को अभिव्यक्त करता है।
उत्तराखंड के विकास में भी रही महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखा समाज ने देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ उत्तराखंड के निर्माण व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शिक्षा, खेलकूद, कला, साहित्य और समाज सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने उत्तराखंड की प्रगति में गोरखा समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य की विकास यात्रा में इस समाज की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहेगी। भारत व नेपाल के पारंपरिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये गहरे सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव पर आधारित हैं। भारत व नेपाल के बीच रोटी-बेटी का आत्मीय संबंध सदियों से कायम है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र से आने के कारण उन्होंने स्वयं बचपन से ही दोनों देशों के बीच साझा संस्कृति, पारिवारिक संबंधों और आपसी आत्मीयता को नजदीक से अनुभव किया है।

गोरखा समाज के विकास के लिए सरकार कर रही प्रयास
सीएम ने कहा कि राज्य सरकार गोरखा समाज के सर्वांगीण विकास, उसकी भाषा, कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण व संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में नेपाली भाषा के अध्ययन के लिए डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त नेपाली भाषा और साहित्य को संस्थागत स्तर पर प्रोत्साहन देने के लिए नेपाली अकादमी को उत्तराखंड भाषा संस्थान के दायरे में लाने की पहल की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि युवा पीढ़ी अपनी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी रहे व अपनी विरासत को आगे बढ़ाने में गौरव का अनुभव करे।
सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था
धामी ने महिला सशक्तीकरण को राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि महिलाओं की उन्नति से ही परिवार, समाज और प्रदेश की वास्तविक प्रगति सुनिश्चित होती है। इसी सोच के अनुरूप राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लखपति दीदी अभियान प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। उन्हें प्रसन्नता है कि राज्य की तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

महाकाली नदी पर पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर महाकाली नदी पर प्रस्तावित पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई व क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र में छारछुम पुल परियोजना के माध्यम से दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच आवागमन और व्यापारिक संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बनबसा में लगभग 368 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से एकीकृत चेक पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्र में ड्राई पोर्ट विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
भारतमाला परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर सितारगंज-टनकपुर मार्ग से बनबसा स्थित भारत-नेपाल सीमा तक लगभग 246 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से चार लेन कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज सहित गोरखा समाज के गणमान्य व्यक्ति, वीर गोरखा कल्याण समिति के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।






