Gorakhpur

Gorakhpur News : योगी संग दिवाली का इंतजार कर रहा वनटांगिया गांव, सज रहे घर, 82 करोड़ की मिलेगी सौगात

Van Tangiya Village : कुसम्ही जंगल के जंगल तिकोनिया नंबर तीन में कल पहुंचेंगे मुख्यमंत्री, सौंपे जाएंगे 52 विकास कार्य, ईको पार्क से लेकर वैश्विक नगर बाजार तक का होगा शिलान्यास

गोरखपुर, 7 नवंबर 2026:

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को वनटांगिया समुदाय के लोगों के साथ दीपावली मनाएंगे। कुसम्ही जंगल स्थित जंगल तिकोनिया नंबर तीन गांव में हर साल की तरह इस बार भी दीपोत्सव की तैयारियां चल रही हैं। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए ग्रामीण अपने घरों को सजा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ इस मौके पर 82.41 करोड़ रुपये की 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे। इनमें वनटांगिया गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए इंटरलॉकिंग सड़क, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

सांसद से सीएम बनने तक बच्चों को तोहफे, गांव को विकास कार्य सौंपने का जारी है सिलसिला

योगी आदित्यनाथ का जंगल तिकोनिया नंबर तीन से पुराना जुड़ाव है। गोरखपुर का सांसद रहते हुए उन्होंने वर्ष 2009 में वनटांगिया परिवारों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू की थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने इस सिलसिले को जारी रखा। अब गांव के लोगों के लिए दीपावली का त्योहार उनके आगमन के बिना अधूरा लगता है। मुख्यमंत्री यहां बच्चों को मिठाई, किताबें, कॉपियां और आतिशबाजी के सामान देते हैं। ग्रामीणों को भी हर साल विकास कार्यों की सौगात मिलती है।

अंग्रेजों के दौर में जंगल बसाने के लिए लाए गए थे वनटांगिया

वनटांगिया समुदाय का इतिहास करीब सौ साल पुराना है। ब्रिटिश शासन के दौरान रेलवे के स्लीपर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर साखू के पेड़ काटे गए थे। जंगलों को दोबारा तैयार करने के लिए अंग्रेजों ने गरीब मजदूरों और भूमिहीन परिवारों को जंगल में बसाया। इसके लिए म्यांमार की टांगिया पद्धति अपनाई गई। इस तरीके से पेड़ लगाने और उनकी देखरेख करने वाले लोग वनटांगिया कहलाए।

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वर्ष 1918 में कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों जंगल तिकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा में इनकी बस्तियां बसाई गईं। महराजगंज के जंगलों में भी इनके 18 गांव बसे। देश आजाद होने के बाद भी इन परिवारों की स्थिति नहीं बदली। इन्हें सामान्य नागरिकों की तरह अधिकार नहीं मिले। जंगल में झोपड़ी बनाने के अलावा दूसरे निर्माण की अनुमति नहीं थी। पत्ते बेचकर गुजारा करने या मजदूरी करने के अलावा कमाई का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। वन विभाग की ओर से बेदखली का डर भी हमेशा बना रहता था।

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शिक्षा और इलाज पहुंचाने से शुरू हुआ बदलाव

वर्ष 1998 में पहली बार सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ को वनटांगिया परिवारों की मुश्किलों की जानकारी मिली। उन्होंने सबसे पहले इन बस्तियों तक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर काम शुरू किया। इसके लिए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के एमपी कृषक इंटर कॉलेज, एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ और गोरखनाथ मंदिर की ओर से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा को जोड़ा गया।

वर्ष 2003 से जंगल तिकोनिया नंबर तीन में शुरू हुए इन प्रयासों का असर 2007 तक दिखने लगा था। गांव के रामगणेश बताते हैं कि पहले वनटांगिया परिवारों की कोई सुध लेने वाला नहीं था। उनका कहना है कि अगर महाराज जी नहीं आते तो समुदाय के लोगों की जिंदगी बदहाली में ही गुजर जाती।

स्कूल बनवाने के लिए दर्ज हुआ था मुकदमा

वनटांगिया बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश के दौरान योगी आदित्यनाथ को कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी। वर्ष 2009 में गांव में बच्चों की पढ़ाई के लिए एस्बेस्टस शीट डालकर अस्थायी स्कूल बनाया जा रहा था। वन विभाग ने इसे अवैध निर्माण बताते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया था। योगी आदित्यनाथ ने इस कार्रवाई का विरोध किया। उनके तर्कों के बाद स्कूल का निर्माण हो सका। आज यह विद्यालय गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से संचालित है।

राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने से बदली पहचान

वनटांगिया परिवारों को अधिकार दिलाने की लड़ाई संसद तक पहुंची। वर्ष 2010 में योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा में इस समुदाय के अधिकारों का मुद्दा उठाया। इसके बाद उन्हें अपने स्थान पर रहने का अधिकार पत्र दिलाने की पहल हुई। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके कार्यकाल के पहले ही साल वनटांगिया बस्तियों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया गया। इससे इन गांवों के लोगों के लिए सरकारी योजनाओं का रास्ता खुला।

गोरखपुर और महराजगंज के 23 वनटांगिया गांवों में इसका असर दिखाई देने लगा। लोगों को पक्के मकान, सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल, स्ट्रीट लाइट, आंगनबाड़ी केंद्र और आरओ वाटर मशीन जैसी सुविधाएं मिलीं। पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड, आधार कार्ड, रसोई गैस कनेक्शन, पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ मिलने लगा। खेती के लिए जमीन के पट्टे भी दिए गए।

बाबा के बिना अधूरा लगता है त्योहार

जंगल तिकोनिया नंबर तीन के रामगणेश कहते हैं कि गांव में आज जो सुविधाएं दिखाई दे रही हैं, वे योगी आदित्यनाथ की कोशिशों का नतीजा हैं। उनके मुताबिक, पहले गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं था। अब हर परिवार के पास पक्का मकान, शौचालय, बिजली और रसोई गैस जैसी सुविधाएं हैं। बच्चों के लिए स्कूल की व्यवस्था भी है।

रामगणेश अपनी लोकभाषा में कहते हैं, ‘बाबा के गोड़ पड़ल त उदयार हो गइल।’ उनका कहना है कि अब दीपावली पर योगी आदित्यनाथ के आने का इंतजार रहता है। उनके बिना त्योहार अधूरा लगता है। गांव के दूसरे परिवार भी मुख्यमंत्री के स्वागत की तैयारी में जुटे हैं।

52 परियोजनाओं पर खर्च होंगे 82.41 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री रविवार को कुल 82.41 करोड़ रुपये के 52 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इनमें 77 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये के 26 कार्यों का शिलान्यास शामिल है। वहीं 4 करोड़ 43 लाख 79 हजार रुपये की लागत वाले 26 कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा।

इनमें रजही चौराहे से जंगल तिकोनिया नंबर तीन होते हुए पिपराइच मार्ग तक इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण प्रमुख है। इस पर 3 करोड़ 65 लाख 11 हजार रुपये खर्च होंगे। सड़क बनने से वनटांगिया गांव के लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने में आसानी होगी। इसके अलावा अलग-अलग गांवों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम भी कराए जाएंगे।

कुसम्ही जंगल में बनेगा ईको पार्क, पिपराइच को मिलेगा नया बाजार

दीपावली के मौके पर मुख्यमंत्री कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच नगर पंचायत में वैश्विक नगर बाजार का शिलान्यास करेंगे। ईको पार्क के निर्माण पर 4 करोड़ 84 लाख 81 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें स्विस कॉटेज समेत पर्यटकों की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इससे कुसम्ही जंगल में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना है।

वहीं पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार के निर्माण पर 1 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपये खर्च होंगे। इसके बनने से स्थानीय दुकानदारों को बेहतर बाजार व्यवस्था मिलेगी। इस परियोजना से क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी तैयारी है।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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