Uttar Pradesh

सरयू नहर परियोजना का विस्तार तेज…पूर्वी यूपी के इलाकों में नहीं होगा सिंचाई संकट

2026-27 में 1655 कुलाबों का निर्माण और नहरों के गैप भरने का लक्ष्य, किसानों को रबी व खरीफ फसलों में मिलेगा सीधा लाभ

लखनऊ, 14 मार्च 2026:

प्रदेश का सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग सरयू नहर परियोजना का विस्तार तेज गति से कर रहा है। इस परियोजना के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने का काम चल रहा है। विभाग का लक्ष्य राष्ट्रीय परियोजना के तहत 14.04 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा से जोड़ना है।

इस दिशा में वर्ष 2026-27 के दौरान नए कुलाबों का निर्माण, नहरों के गैप को भरने और प्रेशर सिंचाई प्रणाली विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी और खेती की उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है।

वर्ष 2026-27 में 1655 कुलाबों का निर्माण

सरयू नहर परियोजना के अंतर्गत पूर्वी उत्तर प्रदेश के नौ जिलों में 9000 कुलाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अब तक करीब 7345 कुलाबों का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष 1655 कुलाबों का निर्माण वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरा करने की योजना है। इससे लगभग 66,200 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिसका लाभ किसानों को रबी और खरीफ दोनों फसलों में मिलेगा।

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नहरों के 14 गैप में निर्माण कार्य जारी

नहरों में कई स्थानों पर गैप होने के कारण बड़े क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसे 14 स्थानों पर निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। यह काम पूरा होने के बाद करीब 27,863 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा।

प्रेशर सिंचाई परियोजना का भी हो रहा विकास

कम जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रेशर सिंचाई परियोजना को भी चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से संचालित की जा रही है। सरयू नहर परियोजना के कमांड एरिया में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अप्रैल 2025 से लागू किया गया है। इस व्यवस्था के जरिए लगभग 1.31 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया है।

फिलहाल कुलाबों के निर्माण और नहरों के गैप भरने से लगभग 0.95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की जा रही है, जबकि शेष क्षेत्र को प्रेशर सिंचाई प्रणाली के माध्यम से जोड़ा जाएगा। विभाग के अनुसार इन प्रयासों से पूर्वांचल के किसानों को सिंचाई के बेहतर साधन उपलब्ध होंगे और खेती की पैदावार में भी वृद्धि होगी।

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