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UP उच्चतर न्यायिक सेवा में बदलाव : पदोन्नति कोटा घटा, विभागीय परीक्षा का दायरा बढ़ा

कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली 1975 में अहम संशोधन को दी गई मंजूरी, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से होने वाली पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर किया 50 प्रतिशत

लखनऊ, 10 मार्च 2026:

सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975 में अहम संशोधन को मंजूरी दे दी गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट की संस्तुति के आधार पर अब उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली 2026 लागू की जाएगी। इस संशोधन के तहत भर्ती, पदोन्नति और चयन प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधानों में बदलाव किया गया है।

सरकार के इस फैसले के तहत नियम-5, नियम-6, नियम-18, नियम-20, नियम-22 तथा परिशिष्ट-1 में संशोधन किया जाएगा। नए प्रावधानों के अनुसार सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से होने वाली पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह पदोन्नति अब श्रेष्ठता और वरिष्ठता के आधार पर होगी और इसके लिए संबंधित अधिकारियों को उपयुक्तता परीक्षा भी पास करनी होगी।

इसके साथ ही सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से पदोन्नति का दायरा बढ़ा दिया गया है। पहले यह कोटा 10 प्रतिशत था जिसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इस व्यवस्था का लाभ उन्हीं सिविल जजों को मिलेगा जिन्होंने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर कम से कम तीन वर्ष की सेवा और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कुल सात वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।

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वहीं अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से न्यायिक सेवा में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। योग्य अधिकारियों को आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलेंगे और न्यायिक व्यवस्था की कार्यक्षमता भी मजबूत होगी।

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