Lucknow City

खाकी की आड़ में ‘पैसा डबल’ का खेल : सरकारी गाड़ी में अगवा कर लूटे 5 लाख, सिपाही समेत 4 गिरफ्तार

निवेश पर मोटे मुनाफे का लालच देकर बुलाते थे शिकार, असलहा दिखाकर लूटते थे नकदी, चिनहट कोतवाली में तैनात है आरोपी सिपाही, दो आरोपी फरार

लखनऊ, 13 जून 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में लोगों को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर निवेश के बहाने लूटपाट करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह में चिनहट कोतवाली में तैनात यूपी पुलिस का सिपाही पूरन सिंह भी शामिल पाया गया है। पुलिस ने सिपाही समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1.25 लाख रुपये नकद और वारदात में प्रयुक्त दो कारें बरामद की हैं।

डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा के मुताबिक वृंदावन योजना सेक्टर-5बी स्थित गिरिधर कुंज निवासी प्रभाकर सिंह ने चिनहट थाने में दो दिन पूर्व शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार उनके भाई दिवाकर सिंह और उनके मित्र एवं प्रॉपर्टी डीलर अनूप शुक्ला को बिजनौर स्थित सीआरपीएफ कैंप में तैनात सिपाही जय प्रकाश यादव ने निवेश पर कम समय में रकम दोगुनी होने का लालच देकर चिनहट स्थित ग्लोबल इन होटल के पास बुलाया था।

पीड़ितों के अनुसार 10 जून को वे पांच लाख रुपये लेकर तय स्थान पर पहुंचे, जहां आरोपियों ने उन्हें पुलिस की सरकारी नंबर प्लेट लगी गाड़ी में असलहा दिखाकर जबरन बैठा लिया। दूसरी कार में भी गिरोह के सदस्य मौजूद थे। आरोप है कि दोनों को अगवा कर बंधक बनाया गया और उनसे पांच लाख रुपये लूट लिए गए। कुछ देर तक उन्हें इधर-उधर घुमाने के बाद जान से मारने की धमकी देते हुए सड़क पर धक्का देकर छोड़ दिया गया।

Constable Among 4 Arrested for Kidnapping Case (1)

मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्वी जोन की सर्विलांस टीम और चिनहट पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। जांच के दौरान लखनऊ के हरदासी खेड़ा नहर पुलिया के पास से गोरखपुर निवासी जावेद हुसैन, आसिफ, संतकबीरनगर निवासी प्रवेश त्रिपाठी तथा राजस्थान के अलवर निवासी पूरन सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। यूपी पुलिस का सिपाही पूरन सिंह लखनऊ की चिनहट कोतवाली में तैनात है।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा देकर लोगों को बुलाता और बाद में पुलिस या अन्य सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर उन्हें डराता-धमकाता था। इसके बाद धोखाधड़ी, जबरन वसूली और लूट की घटनाओं को अंजाम दिया जाता था। पुलिस के अनुसार शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी पीड़ितों को कुछ रकम लौटाकर मामला दबाने की कोशिश भी कर रहे थे।

मुख्य आरोपी जय प्रकाश यादव और उसका साथी आनंद फिलहाल फरार हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

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