Uttarakhand

सास ने सिखाया राखियों का हुनर, बहू ने बढ़ाया बाजार, अब Insta पर मिल रहे ऑनलाइन आर्डर

मालदेवता की सास-बहू ने हुनर से खड़ा किया कारोबार, पिछले साल 1,200 handmade राखियां बेचकर करीब 25 हजार रुपये कमाए, इस बार 2,000 से ज्यादा राखियां बनाने का लक्ष्य, Instagram से मिल रहे online orders ने जोश भरा

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 21 अगस्त 2026:

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के रायपुर ब्लॉक के मालदेवता की लीला रावत व उनकी बहू अलका रावत ने राखी बनाने के काम को अब कारोबार का रूप दे दिया है। दोनों नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के तहत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। पिछले साल उन्होंने करीब 1,200 handmade राखियां तैयार कर बाजार में बेची थीं, जिससे करीब 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ।

इस साल 2,000 राखियों का टॉरगेट

ये भी पढ़ें:

अलका व लीला रावत बतातीं हैं कि पिछले साल मिली कमाई ने दोनों का हौसला बढ़ाया। इस बार उन्होंने 2,000 से ज्यादा राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अब तक करीब 1,500 राखियां तैयार हो चुकी हैं। राखियों की डिजाइन से लेकर पैकेजिंग तक का काम दोनों खुद संभाल रही हैं।

नौकरी छोड़ी, सास के साथ शुरू किया काम

अलका रावत ने पिछले साल निजी नौकरी छोड़कर सास लीला के साथ स्वरोजगार शुरू किया। दोनों ने मालदेवता में विनी वंडर्स क्रिएशन नाम से दुकान शुरू की। यहां राखियों के अलावा कई तरह के handmade व स्थानीय उत्पाद तैयार कर बेचे जाते हैं। लीला रावत वर्ष 2016 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन यानी NRLM से जुड़ी हैं। स्वयं सहायता समूह के जरिए उन्हें स्वरोजगार से जुड़े अवसरों की जानकारी मिली। इसी काम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपनी बहू को भी साथ जोड़ा। दोनों अब मिलकर कारोबार संभाल रही हैं।

Instagram से स्थानीय हुनर को मिला बड़ा बाजार

मालदेवता में तैयार राखियों की बिक्री अब सिर्फ आसपास के बाजारों तक सीमित नहीं है। विनी वंडर्स क्रिएशन के Instagram प्लेटफॉर्म से भी ग्राहकों के ऑर्डर मिल रहे हैं। मांग के मुताबिक राखियां तैयार कर उन्हें ग्राहकों तक भेजा जा रहा है। राखियां बनाने में ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे, रिबन सहित दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। रुद्राक्ष, महाकाल व नजरबट्टू वाले डिजाइन भी तैयार किए जा रहे हैं। डिजाइनिंग, प्रिंटिंग, पैकेजिंग व प्रचार का काम महिलाएं खुद संभाल रही हैं।
dehradun-maldevta-saas-bahu-handmade-rakhi-business-instagram-orders (2)

डोईवाला व सहसपुर की महिलाएं भी मैदान में

रायपुर के अलावा डोईवाला व सहसपुर ब्लॉक की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के तहत वैभव लक्ष्मी व पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं अलग-अलग डिजाइन की राखियां बना रही हैं। इन राखियों की बिक्री रायवाला व श्यामपुर के बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है। सहसपुर ब्लॉक के सक्षम क्लस्टर से जुड़ी महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। ब्लॉक स्तर की प्रदर्शनियों के अलावा सेलाकुई, सहसपुर व विकासनगर में भी इन उत्पादों की बिक्री की जा रही है।

सचिवालय व मॉल में लगेंगे स्टॉल

महिलाओं के products को बड़ा बाजार देने के लिए देहरादून के तीन से चार प्रमुख मॉल में राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाने हैं। इन स्टॉल पर राखियों के साथ पहाड़ी व दूसरे स्थानीय उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह के मुताबिक, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पादों को ज्यादा से ज्यादा बाजार उपलब्ध कराने पर फोकस किया जा रहा है।

बाजार से जुड़ने पर बढ़ रही कमाई की उम्मीद

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि NRLM से जुड़ी महिलाओं के products को बाजार दिलाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। स्थानीय बाजार के साथ online platform पर बिक्री की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।

ये भी पढ़ें  उत्तराखंड : सीमांत इलाकों तक पहुंचेगा NCC, नई Academy समेत कई योजनाओं पर बनी सहमति

Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button