लखनऊ, 19 जुलाई 2026:
यूपी कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पिछले वर्ष शाहजहांपुर में एसडीएम के पद पर तैनाती के दौरान खुले में लघुशंका करने वाले व्यक्ति को उठक-बैठक कराने और बाद में स्वयं कान पकड़कर उठक-बैठक लगाकर माफी मांगने के बाद चर्चा में आए रिंकू सिंह ने अब प्रदेश शासन को भेजे अपने पांच पन्नों के पत्र से प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक को भेजे पत्र में जालौन में एसडीएम न्यायिक पद पर तैनात रिंकू सिंह राही ने अपनी पोस्टिंग, कामकाज, वेतन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है कि उनसे वर्तमान में केवल करीब चार घंटे ही काम लिया जा रहा है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि जब वह अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप काम नहीं कर पा रहे हैं तो सरकार उन्हें पूरी सैलरी क्यों दे रही है।
आईएएस अधिकारी ने शासन से साफ शब्दों में कहा है कि या तो उन्हें उनकी क्षमता के मुताबिक पूरा काम दिया जाए या फिर उन्हें ऐसी जगह तैनात किया जाए जहां वह कानून और नियमों के मुताबिक स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। यदि उत्तर प्रदेश में ऐसी जगह उपलब्ध नहीं है तो उन्हें किसी दूसरे राज्य में भेजने पर विचार किया जाए।

उन्होंने यहां तक लिखा कि यदि आधे काम के लिए ही उनसे काम लिया जा रहा है तो उन्हें आधा वेतन दिया जाए। रिंकू सिंह का दावा है कि कई अधिकारियों के पास दो घंटे से अधिक का काम भी नहीं है। अपने पत्र में रिंकू सिंह ने जालौन में एसडीएम रहते हुए कथित तौर पर सामने आए कुछ मामलों का भी जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की बात कहने पर उन्हें कार्रवाई न करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने प्रभावशाली लोगों से जुड़े कुछ मामलों की निष्पक्ष जांच प्रभावित होने का भी दावा किया है। पत्र में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह और भाजपा विधायक गौरी शंकर वर्मा का भी उल्लेख किया गया है। रिंकू सिंह ने जनता दर्शन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान करने के बजाय कई बार केवल औपचारिक निस्तारण किया जाता है।
गौरतलब है कि इससे पहले रिंकू सिंह राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज चुके हैं। उन्होंने मूल कैडर में भेजे जाने की मांग की थी। बाद में इस्तीफा अस्वीकार कर उन्हें तैनाती दी गई। रिंकू सिंह पहले भी अपने साथ अन्याय होने और काम न करने दिए जाने की बात कह चुके हैं। अब उनका नया पत्र एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।






