
प्रमोद कुमार
मलिहाबाद (लखनऊ), 23 अगस्त 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के काकोरी कस्बा स्थित शीतला माता मंदिर में जीर्णोद्धार के भूमि पूजन के दौरान भाजपा की स्थानीय दलित विधायक जय देवी कौशल के साथ कथित जातिगत भेदभाव का मामला अब महज मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रह गया है। यह मुद्दा धीरे-धीरे सियासी रंग लेता जा रहा है। विधायक के पति एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर ने इसे समाज के आत्मसम्मान से जोड़ते हुए 13 सितंबर को लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर बड़ी ‘आत्मसम्मान रैली’ का ऐलान किया है।
कौशल किशोर का दावा है कि यह आयोजन किसी राजनीतिक दल के मंच के तौर पर नहीं अपितु सामाजिक स्वाभिमान और सम्मान की लड़ाई के रूप में होगा। हालांकि, जिस तरह मंदिर विवाद के बाद इस रैली को लेकर सक्रियता तेज हुई है उससे इसके राजनीतिक संदेश को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
रैली के एजेंडे में ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ यानी पूरे देश में एक समान शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक समानता और आर्थिक समानता जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। इसके साथ ही उन महापुरुषों और वीरांगनाओं के सम्मान का सवाल भी उठाया जाएगा जिनके योगदान को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने का आरोप लगाया जाता रहा है। इनमें 1857 की क्रांति से जुड़ी वीरांगना ऊदा देवी, गंगाराम पासी और महाराज छीता पासी के नाम प्रमुख हैं।
इस रैली की जमीन मई 2026 में मलिहाबाद में आयोजित स्वाभिमान जनसभा के दौरान तैयार की गई थी। इसके बाद सीतापुर, हरदोई, बाराबंकी, उन्नाव और लखनऊ के आसपास के इलाकों में पारख महासंघ के जरिए लगातार तैयारी बैठकें की जा रही हैं। कौशल किशोर समर्थकों से 13 सितंबर को राष्ट्र प्रेरणा स्थल पहुंचने की अपील कर रहे हैं।

मंदिर विवाद के संदर्भ में कौशल किशोर ने कहा है कि मंदिर सबका है, देवियां सबकी हैं और पूजा-अर्चना का अधिकार सभी को समान रूप से मिलना चाहिए। उन्होंने पत्नी जय देवी कौशल के साथ कथित अपमान को साजिश बताते हुए साफ किया है कि समाज के सम्मान पर चोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब सवाल यह है कि 13 सितंबर की यह रैली महज सामाजिक मुद्दों की आवाज बनती है या लखनऊ में एक नए राजनीतिक-सामाजिक शक्ति प्रदर्शन का संकेत देती है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर जुटने वाली भीड़ और उठने वाले सवाल आने वाले दिनों की सियासत की दिशा पर असर डाल सकते हैं।






