लखनऊ/मेरठ, 8 अगस्त 2026:
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में आस्था और सेवा के साथ आधुनिक व्यवस्थाओं की भी अनूठी तस्वीर देखने को मिल रही है। कांवड़ मार्ग पर जगह-जगह लगे सेवा शिविर शिवभक्तों के लिए किसी भव्य आयोजन से कम नजर नहीं आ रहे। कहीं हाईटेक मशीनों से मिनटों में रोटियां तैयार हो रही हैं तो कहीं सात्विक परंपरा को कायम रखते हुए देसी व्यंजनों के साथ पास्ता, पिज्जा, मोमोज, नूडल्स और मंचूरियन जैसे आधुनिक स्वाद भी श्रद्धालुओं को परोसे जा रहे हैं।
नाश्ते में ब्रेड पकौड़ा, वेज हक्का नूडल्स व हनी चिली पोटैटो
शिविरों में कांवड़ियों के लिए पूरे दिन का भोजन समय के अनुसार तय किया गया है। सुबह की शुरुआत चाय, बिस्किट, पोहा और जलेबी से होती है। नाश्ते में समोसा, कचौड़ी, ब्रेड पकौड़ा, वेज हक्का नूडल्स और हनी चिली पोटैटो उपलब्ध हैं। दोपहर के भोजन में शाही पनीर, कढ़ाई पनीर, पनीर लबाबदार, दाल मखनी, मिक्स वेज, चूरचूर नान, बटर नान, जीरा राइस और ताजी रोटियों के साथ रबड़ी-जलेबी, रसमलाई, रसगुल्ला और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयां परोसी जा रही हैं।

स्प्रिंग रोल, चिली पनीर, मंचूरियन, व्हाइट और रेड सॉस पास्ता भी
शाम को मेन्यू का अंदाज और भी आधुनिक हो जाता है। स्प्रिंग रोल, चिली पनीर, मंचूरियन, व्हाइट और रेड सॉस पास्ता, वेज पिज्जा, मोमोज, मैकरोनी, सूप और बर्गर तक श्रद्धालुओं की सेवा में उपलब्ध हैं। रात के भोजन में छोले-पूड़ी, मटर पनीर, पुलाव, दाल और ताजी रोटियों के साथ खीर, हलवा, फ्रूट कस्टर्ड और गुलाब जामुन की व्यवस्था है। लस्सी, छाछ, जूस, चाय, कॉफी और शीतल पेयजल भी लगातार उपलब्ध कराया जा रहा है।
हाईटेक रसोई में रोज बन रही हजारों रोटियां
कंकरखेड़ा व्यापार संघ के शिविर में सेवा को हाईटेक रूप दिया गया है। संयोजक नीरज मित्तल और व्यवस्था संचालक राजेश खन्ना के मुताबिक शिविर में 20 किलो आटा एक साथ गूंधने वाली मशीन और ऑटोमैटिक रोटी मशीन लगाई गई है। यह मशीन करीब एक मिनट में 16 और एक घंटे में लगभग 900 रोटियां तैयार कर सकती है। प्रतिदिन करीब छह से सात हजार रोटियां बनाई जा रही हैं। सब्जियां काटने और मसाले तैयार करने में भी आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है।

व्रतधारी कांवड़ियों के लिए अलग फलाहार
मोदीपुरम के शिविरों में उपवास रखने वाले कांवड़ियों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। सुधीर रस्तोगी के अनुसार कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन, आलू की सब्जी, मौसमी फल और अन्य फलाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। लंबी यात्रा के बाद श्रद्धालुओं को कुल्हड़ में केसरयुक्त गर्म दूध भी दिया जा रहा है।
प्लास्टिक मुक्त भंडार दे रहे पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कई शिविरों को इस बार पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त रखा गया है। प्लास्टिक और थर्माकोल की प्लेटों के बजाय स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वच्छ सर्विंग स्टेशन, व्यवस्थित भोजन व्यवस्था और साफ-सुथरे वातावरण के जरिए श्रद्धालुओं की सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है।
मां कांवड़ सेवा शिविर के संचालक अमित मूर्ति के मुताबिक उद्देश्य सिर्फ भोजन कराना नहीं बल्कि शिवभक्तों की यात्रा को सुरक्षित, सुखद और यादगार बनाना है। शिविर संचालकों का कहना है कि सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता के मानकों का पालन किया जा रहा है। प्रशासनिक टीमें समय-समय पर व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं। सैकड़ों स्वयंसेवक चौबीसों घंटे सेवा में जुटे हैं।






