Lucknow City

15 साल से 7,500 पर अटके आयुष इंटर्न, बोले- दिहाड़ी मजदूर भी हमसे ज्यादा पाता, 25 हजार के लिए लखनऊ में प्रदर्शन

तेज धूप में गांधी प्रतिमा पर जुटे आयुष इंटर्न, MBBS-BDS इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ने पर उठाए सवाल, डिप्टी सीएम के आश्वासन के बाद भी कार्रवाई न होने पर नाराजगी

लखनऊ, 9 सितंबर 2026:

15 साल से स्टाइपेंड में एक रुपये की भी बढ़ोतरी न होने से नाराज आयुष इंटर्न का गुस्सा बुधवार को यूपी की राजधानी की सड़कों पर फूट पड़ा।हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टरों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार से मौजूदा 7,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार करने की मांग की। तेज धूप भी डॉक्टरों का हौसला नहीं तोड़ सकी। कोई छाता लेकर तो कोई पोस्टर-बैनर से सिर ढककर धरने पर बैठा नजर आया।

प्रदर्शनकारी इंटर्न ने ‘मेहनत हमारी पूरी है, 25 हजार मांग जरूरी है’ और ‘काम हमारा पूरा, स्टाइपेंड क्यों आधा-अधूरा’ जैसे नारे लगाए। उनका का कहना है कि वे पढ़ाई के साथ मरीजों के इलाज और अस्पताल से जुड़े कामों में भी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद वर्ष 2011 में तय किया गया 7,500 का स्टाइपेंड आज भी जस का तस है।
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आयुष इंटर्न पवन ने कहा कि वे नीट परीक्षा पास करने के बाद आयुर्वेद की पढ़ाई में दाखिला लेते हैं। साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की इंटर्नशिप होती है लेकिन 2011 से 2026 आ गया और स्टाइपेंड में एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि करीब 250 रुपये प्रतिदिन मिलने वाली रकम में शहर में कमरा किराए पर लेना तक मुश्किल है। बाकी खर्च पूरा करना तो दूर की बात है।

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प्रखर सिंह ने बताया कि पूरे प्रदेश में करीब 5 हजार आयुष इंटर्न हैं। उनके मुताबिक शहर में किराए पर रहने वाले इंटर्न का मासिक खर्च 20 से 25 हजार रुपए तक पहुंच जाता है। दूध, पेट्रोल, राशन, सब्जी और फल समेत हर चीज महंगी हो चुकी है लेकिन उनका स्टाइपेंड 15 साल से वहीं रुका है।

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आयुष इंटर्न ने MBBS और BDS इंटर्न के स्टाइपेंड का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब काम और जिम्मेदारी लगभग समान है तो भुगतान में इतना बड़ा अंतर क्यों है। उनका कहना है कि MBBS इंटर्न के प्रदर्शन के बाद स्टाइपेंड 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार किया गया, फिर आयुष इंटर्न को समान राशि क्यों नहीं दी जा रही?

इंटर्न प्रखर ने आरोप लगाया कि मंगलवार को उन्होंने डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मुलाकात की थी। शाम तक कार्रवाई का आश्वासन मिला लेकिन बुधवार तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे नाराज छात्र फिर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि अधिकारी मिलने को तैयार नहीं और मंत्री के आश्वासन पर भी अमल नहीं हो रहा। इंटर्न ने स्पष्ट किया कि वे 25 हजार स्टाइपेंड मिलने तक अपनी मांग को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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