
लखनऊ, 24 जुलाई 2026:
राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को विभिन्न छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध और CJP के समर्थन में छात्र बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन में AISA, SFI, NSUI, समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं के साथ LGBTQ समुदाय के लोग भी शामिल रहे।

परिवर्तन चौक से शहीद स्मारक तक निकला मार्च
प्रदर्शनकारी पहले परिवर्तन चौक पर एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए करीब दो किलोमीटर पैदल मार्च निकालकर शहीद स्मारक पहुंचे। इस दौरान छात्रों ने ढपली बजाकर विरोध जताया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। LGBTQ समुदाय के युवक-युवतियों ने लिपस्टिक और नेल पॉलिश की मदद से पोस्टरों पर नारे लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया।
परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, ध्यान खींचते रहे स्लोगन
प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भर्ती में देरी और परीक्षा संबंधी विवादों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाना जरूरी है। छात्रों ने मांग की कि परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके। इस दौरान आकर्षक स्लोगन भी दिखे। एक पोस्टर में कहा गया कि ‘आप सारे फूलों को कुचल सकते हो लेकिन बसंत का आना नहीं रोक सकते’ या फिर ‘लीक मंत्री’ और ‘मुझे इस्तीफा लिखना नहीं आता’ जैसे तंज देखने को मिले।

एलयू के कुलपति के खिलाफ भी दिखे पोस्टर
प्रदर्शन के दौरान हाथों में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति के पोस्टर दिखे। उन पर फीस चोरी के आरोपों के स्लोगन लिखे थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन छात्रों और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने, भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने और Exam System को अधिक भरोसेमंद बनाने की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा।






