EOW की जांच पूरी, 2,400 से 3,400 वाले डस्टबिन का 14,160 रुपये में पेमेंट, चेयरमैन समेत 12 फंसे
Dustbin Purchase Case : वाराणसी सेक्टर में FIR दर्ज, महाराजगंज की घुघली नगर पंचायत में 200 डस्टबिन की खरीद का मामला जांच में खरीद प्रक्रिया से लेकर फर्मों के दस्तावेजों तक मिलीं गड़बड़ियां, कई अफसर भी नामजद

वाराणसी, 29 अक्टूबर 2026:
यूपी के वाराणसी सेक्टर के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आठ साल पुराने महाराजगंज जिले की घुघली नगर पंचायत में 200 डस्टबिन की खरीद में घोटाले की FIR दर्ज कराई है। वर्ष 2018 में हुई इस खरीद में प्रति डस्टबिन 14,160 रुपये की दर से 27.36 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। जांच में स्थानीय बाजार में इसी क्षमता के डस्टबिन की कीमत 2,400 से 3,400 रुपये के बीच मिली। EOW की उपनिरीक्षक सुधा सिंह की ओर से दर्ज कराई गई FIR में तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष, अधिकारियों, कर्मचारियों समेत 12 लोगों को नामजद किया गया है।
बाजार की दर से कई गुना ज्यादा कीमत
Ghughuli Nagar Panchayat, Maharajganj News : दरअसल टाउन एरिया ने 100 लीटर क्षमता वाले डस्टबिन खरीदे थे। इनकी कीमत पर सवाल उठाए गए हैं। कोषाधिकारी कार्यालय की टीम ने स्थानीय बाजार में सर्वे किया। इसमें डस्टबिन की कीमत 2,400 से 3,400 रुपये के बीच मिली, जबकि नगर पंचायत ने निविदा में 14,160 रुपये प्रति डस्टबिन की दर स्वीकार की थी। जांच के दौरान सिंटेक्स कंपनी के अधिकृत डीलर से मिली जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2025 में 100 लीटर क्षमता वाले डस्टबिन की कीमत स्टैंड सहित 6,020 रुपये बताई गई थी।
200 डस्टबिन के लिए 27.36 लाख रुपये का भुगतान
नगर पंचायत घुघली में 200 डस्टबिन की आपूर्ति के लिए वर्ष 2018 में निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए 24 अगस्त 2018 को अल्पकालीन निविदा सूचना जारी हुई। इसका प्रकाशन 26 व 27 अगस्त को समाचार पत्रों में कराया गया। एक सितंबर 2018 को निविदा खोली गई। इसमें तीन फर्मों ने हिस्सा लिया था। सबसे कम दर देने के आधार पर सौरभ एग्रो केमिकल्स को आपूर्ति का काम दिया गया।
डस्टबिन की आपूर्ति के लिए फर्म को दो किस्तों में भुगतान किया गया। पहली किस्त के रूप में 20 मई 2023 को 13.68 लाख रुपये, जबकि दूसरी किस्त के रूप में 21 अगस्त 2023 को 13.68 लाख रुपये दिए गए। इस तरह कुल भुगतान 27.36 लाख रुपये हुआ।
निविदा प्रक्रिया में भी मिली अनियमितता
EOW की जांच में निविदा जारी करने से लेकर फर्म के चयन तक कई स्तरों पर गड़बड़ियां सामने आने का उल्लेख है। जांच के मुताबिक, अल्पकालीन निविदा जारी करने का पर्याप्त कारण नहीं था। निविदा प्रकाशन के चार दिन बाद ही इसे खोल दिया गया। इससे प्रचार-प्रसार के लिए पर्याप्त समय मिलने पर सवाल उठे।

जांच में यह भी सामने आया कि सौरभ एग्रो केमिकल्स की ओर से जमा दस्तावेजों में दूसरी फर्म नारायण एग्रो केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स के खाते से जुड़ा टीडीए पाया गया। FIR में दोनों फर्मों के बीच मिलीभगत का आरोप दर्ज है। सौरभ एग्रो केमिकल्स की ओर से जमा सिंटेक्स कंपनी के अधिकृत डीलर प्रमाणपत्र की वैधता संबंधी तारीख में भी छेड़छाड़ किए जाने की बात कही गई है।
12 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
इस मामले में तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष उर्मिला देवी, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी लव कुमार मिश्रा, तत्कालीन लिपिक हीरा प्रसाद, नगर पंचायत अध्यक्ष संतोष जायसवाल, तत्कालीन प्रशासक सत्य प्रकाश मिश्र, तत्कालीन अपर जिलाधिकारी इंद्र भूषण वर्मा, बृजेश कुमार गुप्ता, आलोक कुमार, उमाशंकर पति त्रिपाठी, सौरभ एग्रो केमिकल्स के प्रोपराइटर संजय सिंह, नारायण एग्रो केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स की प्रोपराइटर सीमा सिंह, सौरभ एग्रो केमिकल्स के अधिकृत प्रतिनिधि लक्ष्मी शंकर सिंह को नामजद किया गया है।






