Uttarakhand

‘सैफ्रन सर्ज’ में उतारा RSS की सेवा से सांस्कृतिक चेतना तक का सफर, विमोचन पर युवाओं से की ये खास अपील

देहरादून में पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय की पुस्तक सैफ्रन सर्ज का विमोचन, संघ के संगठनात्मक विस्तार, सेवा कार्यों और सामाजिक बदलाव से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित है पुस्तक, भारतीय ज्ञान परंपरा, हिंदुत्व व राष्ट्रीय चेतना को भी जगह, वक्ताओं ने नई पीढ़ी को सभ्यतागत जड़ों से जुड़ने की जरूरत बताई

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 21 अगस्त 2026:

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की संगठनात्मक यात्रा, संघर्ष, सेवा गतिविधियों, भारतीय ज्ञान परंपरा व सांस्कृतिक चेतना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को ‘सैफ्रन सर्ज’ पुस्तक में समेटा गया है। करीब 299 पेज की इस पुस्तक का विमोचन सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में हुआ। कार्यक्रम में संघ के उत्तराखंड प्रांत प्रचारक डॉ शैलेंद्र मुख्य वक्ता रहे।

बंगाल से पूर्वोत्तर भारत तक सेवा कार्यों का जिक्र

ये भी पढ़ें:

डॉ शैलेंद्र ने कहा कि पुस्तक में बंगाल से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक संघ के संगठनात्मक विस्तार की यात्रा को जगह दी गई है। असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम समेत कई इलाकों में सेवा गतिविधियों का भी उल्लेख है। उन्होंने मणिपुर में मैतेई-कुकी संघर्ष के दौरान स्वयंसेवकों की ओर से किए गए राहत कार्यों का जिक्र किया।

saffron-surge-book-rss-tarun-vijay-dehradun (2)

जनजातीय क्षेत्रों के काम भी शामिल

उन्होंने कहा कि जनजातीय इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य व सामाजिक जागरण से जुड़े काम संघ से जुड़े संगठनों की गतिविधियों का अहम हिस्सा रहे हैं। वनवासी कल्याण आश्रम जैसी संस्थाओं के काम को भी पुस्तक में सामने रखा गया है। असम में कार्यकर्ताओं के अपहरण व हत्या, ओडिशा में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी सेवा गतिविधियां जारी रहीं।

धार्मिक आयोजनों से सामाजिक सरोकार का जिक्र

डॉ शैलेंद्र ने रामसेतु आंदोलन, प्रयागराज कुंभ व कांवड़ यात्रा के दौरान चलाए गए सेवा कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने नेत्र कुंभ, पर्यावरण संरक्षण, समरसता कुंभ व युवा कुंभ जैसे आयोजनों को धार्मिक गतिविधियों से आगे सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास बताया। उनके मुताबिक संघ व उससे जुड़े संगठनों की ओर से देशभर में दो लाख से ज्यादा सेवा कार्य चलाए जा रहे हैं।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर

डॉ शैलेंद्र ने संस्कृत को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ते हुए नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला, उज्जैन व कांची जैसे पुराने शिक्षा केंद्रों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भाषा, शिक्षा व सामाजिक संस्थाओं की भूमिका अहम है। उन्होंने भारतीय मूल के लोगों की वैश्विक भूमिका का भी जिक्र किया। वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस व वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम जैसी पहलों के जरिए भारतीय संस्कृति व विचारों पर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रही चर्चा की बात कही। उन्होंने युवा शक्ति, मातृशक्ति, संत समाज व सामाजिक संस्थाओं के साझा प्रयासों की जरूरत बताई।

सभ्यतागत जड़ों से जुड़ना जरूरी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी ने कहा कि भारत की सभ्यतागत पहचान को समझने के लिए भाषा, संस्कृति, ज्ञान परंपरा व मूल विचारों से जुड़ना जरूरी है। उनके मुताबिक किसी समाज के पुनर्जागरण में विचारों की बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने पुस्तक में भारत की लंबी सभ्यतागत यात्रा के अलग-अलग पड़ावों को सामने रखे जाने की बात कही। बंगाल के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य के साथ सिलिगुड़ी कॉरिडोर के सामरिक महत्व का भी जिक्र किया।

संस्कृत को ज्ञान परंपरा की अहम भाषा बताया

अनिल रतूड़ी ने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भाषा रही है। ऐतिहासिक परिस्थितियों व औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था के असर से समाज का एक हिस्सा पारंपरिक भाषाओं व ज्ञान परंपरा से दूर हुआ। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद राजनीतिक आजादी के साथ सांस्कृतिक व मानसिक स्तर पर औपनिवेशिक प्रभावों को समझने की जरूरत बताई। उन्होंने हिंदुत्व को सिर्फ कर्मकांड तक सीमित न रखने की बात कही। सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे व्यापक मानवीय मूल्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने नई पीढ़ी से भारतीय सभ्यतागत विरासत व उसके मूल विचारों को समझने की अपील की।

किताबों से नई पीढ़ी तक पहुंचेंगे विचार

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि भारत में पूजा-पद्धतियां, भाषाएं, बोलियां, पहनावे व खान-पान अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के प्रति साझा भावना समाज को एक सूत्र में जोड़ती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के जरिए राष्ट्रवादी विचार व राष्ट्रीय चेतना नई पीढ़ी तक पहुंचाई जा सकती है।

पुस्तक को कई भाषाओं में लाने की मांग

राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि किताब केवल पढ़कर अलमारी में रखने की चीज नहीं होती, बल्कि वह विचारों को दिशा देने का माध्यम भी बनती है। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में प्रकाशित सैफ्रन सर्ज के जरिए संघ की सौ साल की यात्रा व इस दौरान हुए सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों को समझने का मौका मिलेगा। बंसल ने पुस्तक का हिंदी के साथ दूसरी भारतीय भाषाओं में अनुवाद कराने की जरूरत बताई। उन्होंने लेखक तरुण विजय से क्षेत्रीय भाषाओं में इसके संस्करण उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

बदलती सांस्कृतिक चेतना पर लेखक का फोकस

पुस्तक के लेखक व पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने कहा कि सैफ्रन सर्ज के जरिए RSS, हिंदुत्व व हिंदू सांस्कृतिक चेतना के बढ़ते प्रभाव को समझने का प्रयास किया गया है। उन्होंने संघ स्वयंसेवकों के संघर्ष व बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी कई स्वयंसेवकों व उनके परिवारों ने सामाजिक व वैचारिक काम जारी रखे। उन्होंने पुस्तक में ऐतिहासिक घटनाओं, धार्मिक प्रतीकों व औपनिवेशिक दौर से जुड़े प्रसंगों को शामिल किए जाने की जानकारी दी। उनके मुताबिक पुस्तक में भारतीय सभ्यता, परंपरा व राष्ट्रीय चेतना के संदर्भ में बदलते सामाजिक परिदृश्य को सामने रखने की कोशिश की गई है।

युवाओं से पुस्तक पढ़ने की अपील

कार्यक्रम के संयोजक व मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी राजेश सेठी ने अतिथियों का आभार जताया। उन्होंने युवाओं से सैफ्रन सर्ज में शामिल राष्ट्रीय भाव व विचारों को समझने की अपील की। मंच पर प्रकाशक आलोक गोस्वामी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र खंडूड़ी ने किया। कार्यक्रम में क्षेत्र प्रचार प्रमुख तपन, प्रांत व्यवस्था प्रमुख नीरज मित्तल, विभाग प्रचारक धनंजय, विभाग कार्यवाह रविंद्र चौहान, अरुण शर्मा, मनीष बागड़ी व अन्य लोग मौजूद रहे।

ये भी पढ़ें  संवासिनी की मौत के बाद मंत्री रेखा आर्या सख्त... नारी निकेतन में तैनात होंगे मनोचिकित्सक

Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button