Varanasi

Varanasi News : 30 लाख का इनामी नक्सली मुठभेड़ में ढेर, घेराबंदी होते ही ATS पर दागीं गोलियां

रामनगर थाना क्षेत्र में हुई भिड़ंत, 30 लाख का घोषित था इनाम, दो पिस्टल बरामद, 8 साल से NIA को थी तलाश, झारखंड के TPC का कमांडर था बृजेश गंझू, जवाबी फायरिंग में घायल होने के बाद अस्पताल में मौत

वाराणसी, 20 सितंबर 2026:

यूपी के वाराणसी में ATS ने 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह को मुठभेड़ में मार गिराया। रामनगर थाना क्षेत्र में रविवार सुबह करीब 4 बजे हुई कार्रवाई के दौरान बृजेश ने घेराबंदी देखकर ATS टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मुगलसराय की तरफ जाने की मिली थी सूचना

ATS के मुताबिक, टीम को सूचना मिली थी कि बृजेश रामनगर होते हुए मुगलसराय की तरफ जाने वाला है। इसके बाद ATS कमांडो ने इलाके में घेराबंदी कर दी। इसी दौरान बृजेश अपने एक साथी के साथ बाइक से वहां पहुंचा। टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन पकड़े जाने के डर से उसने दोनों हाथों में पिस्टल थामे फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में DSP विपिन राय और हेड कॉन्स्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोलियां लगीं।

जवाबी फायरिंग में सड़क पर गिरा

ATS टीम ने फायरिंग का जवाब दिया। इस दौरान बृजेश को गोली लगी और वह सड़क पर गिर गया। उसका साथी मौके से भाग निकला। ATS ने घायल बृजेश को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके से ATS को दो पिस्टल मिलीं हैं। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर फोरेंसिक टीम की मदद से मौके से सबूत जुटाए। शव को पोस्टमार्टम के लिए लाल बहादुर शास्त्री पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया है।

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30 लाख का था इनाम

बृजेश गंझू पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था। झारखंड सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये, जबकि NIA ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। करीब आठ साल पहले NIA ने उसे Terror Funding Case में वांटेड घोषित किया था। उसके घर की कुर्की भी की गई थी। मुठभेड़ के बाद ATS और स्थानीय पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। फरार साथी की तलाश में आसपास के इलाकों में भी जांच की जा रही है।

ट्रांसपोर्टरों और कोयला कंपनियों से वसूली का आरोप

46 वर्षीय बृजेश गंझू झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का रहने वाला था। उसका मूल गांव लूटू बताया गया है। वह लंबे समय से ठिकाने बदलकर रह रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में उसके कई नाम दर्ज हैं। इनमें गोपाल सिंह भोक्ता, दुलारचंद गंझू, रंजन, फुलचंद गंझू और सरदार शामिल हैं। बृजेश पर ट्रांसपोर्टरों, कोयला खनन कंपनियों और ठेकेदारों से वसूली करने के आरोप थे। शुरुआत में वह बीड़ी पत्ता के ठेकेदारों से वसूली करता था। CCL की आम्रपाली और मगध कोयला परियोजनाओं के शुरू होने के बाद उसने कोयला खनन से जुड़ी कंपनियों को निशाना बनाना शुरू किया।

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2004 में माओवादी संगठन से अलग हुआ था

बताया जाता है कि 2004 में बृजेश ने भाकपा माओवादी से अलग होकर अपना गुट बनाया था। बाद में उसका प्रभाव झारखंड के चतरा, रांची और हजारीबाग समेत कई इलाकों में बढ़ा। उसने बिहार के कुछ हिस्सों में भी अपना नेटवर्क फैलाया। इसके बाद तृतीय प्रस्तुति कमेटी यानी TPC और माओवादी संगठन के बीच लंबे समय तक वर्चस्व की लड़ाई चलती रही। बृजेश इसी संगठन का कमांडर था। NIA लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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