Varanasi

काशी में सजे ओडिशा के रंग, मंत्री का बड़ा टूरिज्म ऑफर, बोले- यूपी में प्रोजेक्ट लगाइए, सरकार देगी हरसंभव सहयोग

ओडिशा परब में दिखी कला, संस्कृति और खानपान की अनूठी झलक, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने काशी-पुरी और अयोध्या-कोणार्क को जोड़कर नए टूरिज्म सर्किट बनाने पर दिया जोर, बोले- ‘दो राज्यों का एक अनुभव’ बढ़ाएगा रोजगार और निवेश

वाराणसी, 23 अगस्त 2026:

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी ओडिशा की कला, संस्कृति, खानपान और पर्यटन के रंग में रंगी हुई है। दीनदयाल हस्तकला संकुल में सोमवार तक चलने वाला ‘ओडिशा परब’ उत्तर प्रदेश और ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर ला रहा है। आयोजन में जहां ओडिशा की लोक और शास्त्रीय कलाओं की प्रस्तुति पर्यटकों को आकर्षित कर रही है, वहीं पारंपरिक व्यंजन काशीवासियों को ओडिशा के स्वाद से रूबरू करा रहे हैं।

इस कार्यक्रम में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इसे दोनों राज्यों के बीच पर्यटन सहयोग की नई शुरुआत बताया। उन्होंने ओडिशा सरकार को यूपी में पर्यटन परियोजनाएं विकसित करने का न्योता देते हुए कहा कि भविष्य में यदि ओडिशा सरकार को उत्तर प्रदेश में पर्यटन परियोजनाओं के लिए भूमि की आवश्यकता होती है तो प्रदेश सरकार हरसंभव सहयोग करेगी।

काशी-पुरी और अयोध्या-कोणार्क को जोड़ने की तैयारी

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जयवीर सिंह ने कहा कि काशी और पुरी तथा अयोध्या और कोणार्क जैसे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र दोनों राज्यों की साझा विरासत और पर्यटन क्षमता को दर्शाते हैं। यूपी की आध्यात्मिकता, विरासत, लोक संस्कृति और खानपान जहां पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, वहीं ओडिशा की समुद्री विरासत, मंदिर, प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और हथकरघा इस साझेदारी को और मजबूत बना सकते हैं।

उन्होंने संयुक्त पर्यटन सर्किट, साझा प्रचार अभियान, ट्रैवल ट्रेड मीट और बी2बी संवाद को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि यूपी आने वाला पर्यटक ओडिशा के पर्यटन स्थलों से परिचित हो और ओडिशा जाने वाला पर्यटक उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करे। इससे होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, हस्तशिल्प, खानपान और स्थानीय कारोबार में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

यूपी में पर्यटन का रिकॉर्ड, 2025 में पहुंचे करीब 156 करोड़ पर्यटक

पर्यटन मंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन को विकास, रोजगार और निवेश का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक 2022 में करीब 32 करोड़, 2023 में 48 करोड़, 2024 में लगभग 65 करोड़ और 2025 में रिकॉर्ड करीब 156 करोड़ पर्यटकों का प्रदेश में आगमन हुआ। वर्ष 2026 में जून तक 41 करोड़ से अधिक पर्यटक यूपी पहुंच चुके हैं।

उन्होंने कहा कि पर्यटन को विजन-2047 और वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। अब पर्यटन का मतलब केवल मंदिर और स्मारक देखना नहीं, बल्कि संस्कृति, खानपान, कला, शिल्प और स्थानीय जीवन का अनुभव हासिल करना भी है। काशी की सिल्क, मुरादाबाद का पीतल, भदोही की कालीन और कन्नौज का इत्र इसी ‘अनुभव आधारित पर्यटन’ का हिस्सा बन रहे हैं।

सारनाथ से बौद्ध पर्यटन को मिलेगी वैश्विक उड़ान

जयवीर सिंह ने सारनाथ की वैश्विक पहचान को भी पर्यटन के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से बौद्ध पर्यटन को नई वैश्विक पहचान मिली है और जापान समेत दुनिया के बौद्ध देशों से पर्यटकों को आकर्षित करने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

काशी में ओडिशा का नृत्य भी, स्वाद भी

ओडिशा परब में ओडिसी, गोटीपुआ, संबलीपुरी, घूमरा, ढेमसा और पाइका अखाड़ा जैसी प्रस्तुतियां दर्शकों को ओडिशा की जीवंत सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रही हैं। वहीं छेना पोड़ा और रसगुल्ला जैसे पारंपरिक व्यंजन आयोजन में पहुंचने वाले लोगों को ओडिशा के स्वाद का अनुभव करा रहे हैं। जयवीर सिंह ने कहा कि पीएम मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को ऐसे आयोजन नई मजबूती देते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि काशी में आयोजित ओडिशा परब दोनों राज्यों के बीच पर्यटन, संस्कृति, निवेश और जन-जन के रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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