त्यूणी-प्लासू जल विद्युत परियोजना को केंद्र से हरी झंडी, धामी बोले- ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा उत्तराखंड
यूजेवीएन लिमिटेड की 72 मेगावाट क्षमता की परियोजना, टौंस नदी पर होगा निर्माण, प्रतिवर्ष 29.85 करोड़ यूनिट विद्युत उत्पादन का अनुमान, सीएम ने कहा- राज्य में जल विद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं

देहरादून, 31 अक्टूबर 2026ः
उत्तराखंड में जल विद्युत उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। यूजेवीएन लिमिटेड की 72 मेगावाट क्षमता की त्यूणी-प्लासू जल विद्युत परियोजना को केंद्र सरकार से स्वीकृति मिल गई है। अब देहरादून की त्यूणी तहसील में टौंस नदी पर प्रस्तावित परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 298.51 मिलियन यूनिट (29.85 करोड़ यूनिट) विद्युत उत्पादन का अनुमान है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने परियोजना को स्वीकृति मिलने पर कहा कि यह उत्तराखंड को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
स्वीकृति के लिए लंबे समय से किए जा रहे थे प्रयास
सीएम ने कहा कि राज्य में जल विद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए इन संभावनाओं का समुचित उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि त्यूणी-प्लासू जल विद्युत परियोजना के पूर्ण होने से प्रदेश की विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल विद्युत परियोजनाओं से संबंधित आवश्यक स्वीकृतियों व प्रक्रियाओं को समय से आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने बताया कि त्यूणी-प्लासू जल विद्युत परियोजना को अंतिम वन स्वीकृति प्राप्त होना लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों की महत्वपूर्ण सफलता है। इससे परियोजना के निर्माण संबंधी कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
जल संसाधनों का पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जाएगा
निगम सभी प्रक्रियाओं का अनुपालन करते हुए परियोजना के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जल विद्युत क्षमता के विकास व ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कहा कि उत्तराखंड में उपलब्ध जल संसाधनों का पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए उपयोग करना राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। त्यूणी-प्लासू जैसी परियोजनाओं के विकास से प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ ही ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।






