Lucknow City

जापान की टेक्नोलॉजी, यूपी का टैलेंट : 2047 के ग्लोबल इंडस्ट्री हब की नींव रख रहा प्रदेश

लखनऊ में यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के समापन सत्र में सीएम योगी का बड़ा विजन, 600 करोड़ के फंड से बढ़ेगा जापानी निवेश, यामानाशी मॉडल को दूसरे प्रीफेक्चर्स तक ले जाने की तैयारी, ग्रीन हाइड्रोजन, GCC, मैन्युफैक्चरिंग, स्किल और टूरिज्म में साझेदारी को मिलेगी रफ्तार

लखनऊ, 22 अगस्त 2026:

यूपी और जापान के बीच रिश्ते अब निवेश से आगे बढ़कर दीर्घकालिक और भरोसे पर आधारित औद्योगिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के वेलेडक्टरी सेशन में साफ किया कि जापान उत्तर प्रदेश के लिए केवल निवेशक नहीं अपितु ‘को-क्रिएटर’ है। सरकार का लक्ष्य एमओयू को जमीन पर उतारकर उत्पादन, उत्पादन को ग्लोबल एक्सपोर्ट और निवेश को रोजगार में बदलना है।

सीएम ने कहा कि जापान की प्रिसिजन, तकनीक और हाई-क्वालिटी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को यूपी के विशाल बाजार, युवा शक्ति और टैलेंट से जोड़ा जाएगा। इससे यूपी को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि 2047 के भारत के उद्योग आज डिजाइन हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश चाहता है कि जापान के साथ मिलकर उन उद्योगों का भविष्य तैयार किया जाए।

जापानी भाषा में स्वागत, साझेदारी का दिया आत्मीय संदेश

ये भी पढ़ें:

सीएम योगी ने जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत जापानी भाषा में ‘कोनिचिवा मिनासान’ कहकर किया और संबोधन के अंत में ‘अरिगातो गोजाइमासु’ के साथ आभार जताया। मुख्यमंत्री के इस सांस्कृतिक संवाद ने निवेश सम्मेलन में कारोबारी रिश्तों के साथ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव और विश्वास को भी रेखांकित किया।

up-japan-investment-meet-global-industry-hub-yogi (2)

उन्होंने जापान की औद्योगिक सफलता का उल्लेख करते हुए काइजेन, मोनोजुकुरी और ‘वा’ यानी सामाजिक सामंजस्य को वहां की कार्य संस्कृति की ताकत बताया। शिंकानसेन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जापान ने तकनीक के साथ प्रिसिजन, स्पीड के साथ सेफ्टी और विकास के साथ रिलायबिलिटी को जोड़कर दुनिया के सामने विकास का एक प्रभावी मॉडल रखा है।

यूपी की युवा शक्ति बनेगी जापानी इंडस्ट्री की ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और आधुनिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार हो रहा है। प्रदेश अब ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम तैयार कर रहा है जो उद्योगों को स्पीड, नागरिकों को सेफ्टी और निवेशकों को रिलायबिलिटी दे। जापान की औद्योगिक विशेषज्ञता और यूपी की युवा शक्ति के मेल को उन्होंने भविष्य की बड़ी ताकत बताया। युवाओं को जापानी भाषा, इंडस्ट्री आधारित तकनीकी कौशल और जापानी वर्क कल्चर से जोड़ने की योजना पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि लक्ष्य ‘इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार स्किल और स्किल के अनुसार एंप्लॉयमेंट’ का मजबूत इकोसिस्टम बनाना है।

600 करोड़ के फंड से जापानी MSME निवेश को मिलेगी रफ्तार

यूपी-जापान बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक पहलू यामानाशी प्रीफेक्चर की एमएसएमई कंपनियों से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यामानाशी के गवर्नर ने उत्तर प्रदेश में जापानी एमएसएमई के निवेश के लिए 600 करोड़ रुपये के फंड की घोषणा की है। इसे उत्तर प्रदेश में जापानी उद्योगों के बढ़ते विश्वास का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

यामानाशी के साथ सहयोग को संस्थागत स्वरूप देने के लिए इन्वेस्ट यूपी में डेडिकेटेड यामानाशी डेस्क स्थापित की जाएगी। निवेश परियोजनाओं, अप्रूवल, उद्योगों की जरूरत और संभावित समस्याओं की हर 90 दिन में समीक्षा की जाएगी। इससे एमओयू से निवेश तक की प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास होगा।

up-japan-investment-meet-global-industry-hub-yogi (3)

यामानाशी मॉडल से जापान के दूसरे प्रीफेक्चर तक बढ़ेगा दायरा

सरकार अब यामानाशी के साथ विकसित होने वाले मॉडल को जापान के अन्य प्रीफेक्चर्स तक विस्तार देने की तैयारी में है। शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। गलगोटियास यूनिवर्सिटी और जापानी प्रतिनिधिमंडल के बीच एमओयू के बाद यूपी के अन्य विश्वविद्यालयों और जापानी संस्थानों के बीच भी इसी तरह की साझेदारी विकसित करने की योजना है।

हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग, पॉलिटेक्निक, नर्सिंग और तकनीकी शिक्षा से जुड़े युवाओं को जापानी भाषा और सेक्टर-स्पेसिफिक स्किल की ट्रेनिंग देने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे जापानी कंपनियों को प्रशिक्षित मैनपावर और यूपी के युवाओं को ग्लोबल रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

ग्रीन हाइड्रोजन से लेकर GCC तक नए अवसर

यूपी-जापान सहयोग का अगला बड़ा क्षेत्र ग्रीन हाइड्रोजन है। आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं। यामानाशी के साथ पायलट प्रोजेक्ट विकसित करने और भारतीय-जापानी कंपनियों के बीच टेक्नोलॉजी व बिजनेस पार्टनरशिप बनाने पर सहमति बनी है। अक्टूबर 2026 में यामानाशी में होने वाले इंटरनेशनल हाइड्रोजन समिट में यूपी अपना प्रतिनिधिमंडल भेजेगा।

वहीं नोएडा और ग्रेटर नोएडा के GCC इकोसिस्टम में जापानी कंपनियों को निवेश और बिजनेस सेटअप के लिए आमंत्रित किया गया है। सरकार का लक्ष्य जापानी कंपनियों को केवल भारत में उत्पादन करने तक सीमित रखने के बजाय यूपी को उनके ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।

बौद्ध सर्किट बनेगा जापान-यूपी पर्यटन कनेक्शन

निवेश के साथ पर्यटन और संस्कृति को भी साझेदारी का आधार बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बौद्ध सर्किट के जरिए जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित किया जाएगा। पर्यटन फेस्टिवल्स में यूपी भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ अपनी हॉस्पिटैलिटी को भी जापान में प्रस्तुत करेगा। सीएम ने कहा कि 2047 में जब भारत स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा तब उनकी आकांक्षा है कि यूपी में काम कर रही जापानी कंपनियां यह कहें कि उन्होंने केवल भारत में निवेश नहीं किया अपितु अपना ‘ग्लोबल फ्यूचर’ उत्तर प्रदेश से बनाया।

ये भी पढ़ें  जापान से यूपी तक निवेश की नई राह, 200 से ज्यादा CEO दिल्ली पहुंचे, योगी ने बताई साझेदारी की दिशा

Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button