
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 12 सितंबर 2026ः
उत्तराखंड में बेशकीमती सरकारी जमीन को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने धामी सरकार पर सरकारी जमीन बड़े कॉरपोरेट घरानों को दीर्घकालीन लीज पर सौंपने की तैयारी का आरोप लगाया। प्रदेश कांग्रेस चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने सीएम धामी पर हमला बोलते हुए आरोप है कि सरकार करीब 7,000 बीघा सरकारी जमीन का लैंड बैंक तैयार कर उसे निजी निवेशकों को 90 वर्ष तक की लीज पर देने जा रही है। सरकार को इस पूरी नीति पर श्वेतपत्र जारी करना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रदेश सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा और चार्जशीट कमेटी के सदस्यों ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड की अध्यक्षता मुख्यमंत्री के पास है, इसलिए इस नीति की राजनीतिक व प्रशासनिक जवाबदेही सीधे सरकार के शीर्ष नेतृत्व की बनती है। कांग्रेस के मुताबिक उद्यान विभाग, पोटेटो प्रोजेक्ट, ब्रीडिंग गार्डन समेत विभिन्न विभागों की खाली या कम उपयोग वाली जमीनों को मिलाकर करीब 7,000 बीघा का लैंड बैंक तैयार किया गया है, जिसे 90 साल की लीज पर खास कॉरपोरेट कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
कांग्रेस ने पूछा कि जब आम नागरिकों के लिए जमीन खरीदने की सीमा तय है तो चुनिंदा कॉरपोरेट कंपनियों को हजारों बीघा सरकारी जमीन इतनी लंबी अवधि के लिए देने का औचित्य क्या है? उन्होंने लीज की जमीन को आगे उप-लीज करने और उसे बंधक रखकर बैंक से ऋण लेने की अनुमति पर भी सवाल उठाया। कांग्रेस ने आशंका जताई कि ऐसी व्यवस्था भविष्य में सरकारी जमीन के स्थायी निजीकरण का रास्ता खोल सकती है। उन्होंने कहा कि यदि जमीन का इस्तेमाल होटल, रिसॉर्ट और व्यावसायिक टाउनशिप के लिए होना है तो उसका लीज रेंट कृषि भूमि के सर्किल रेट पर क्यों तय किया जा रहा है। कृषि और व्यावसायिक दरों के भारी अंतर के कारण सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है।
जॉर्ज एवरेस्ट पर भी सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट के निजी संचालन को लेकर सरकार पर सवालों की बौछार की। उन्होंने कहा कि एशियाई विकास बैंक के ऋण से करोड़ों रुपये खर्च कर सरकारी स्तर पर वहां पर्यटन सुविधाएं विकसित की गईं। इसके बाद करीब 142 एकड़ क्षेत्र और विकसित सुविधाओं को 15 वर्ष के लिए निजी कंपनी को लगभग एक करोड़ रुपये सालाना की दर पर दिए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया। आर्य ने आरोप लगाया कि निविदा प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के बीच कारोबारी संबंधों और बाद में प्रतिस्पर्धी कंपनियों के विजेता कंपनी से जुड़ने की स्थिति की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
‘सरकारी संपत्ति की बंदरबांट नहीं होने देंगे’
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जल, जंगल और जमीन उत्तराखंड की जनता की सामूहिक संपत्ति हैं। सरकार को निवेश के नाम पर सरकारी जमीन के इस्तेमाल की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। पार्टी ने जमीनों के मूल्यांकन, लीज की शर्तों, कंपनियों की पात्रता और निविदा प्रक्रिया का स्वतंत्र परीक्षण कराने की मांग की है। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन सवालों का जवाब नहीं दिया तो सरकारी जमीन और निवेश परियोजनाओं को लेकर पार्टी प्रदेशभर में बड़ा राजनीतिक अभियान चलाएगी।






