Ayodhya Deepotsav : अयोध्या की सड़कों पर दिखेगी रामायण की झलक, 14 झांकियों में सजेंगे 7 कांडों के प्रमुख प्रसंग
Ram Katha Jhanki : बालकांड से उत्तरकांड तक के प्रसंग होंगे जीवंत, 3डी मॉडल से दिखेगी रामायण की कहानी, सात राज्यों के लोकनृत्य भी बनेंगे आकर्षण
लखनऊ/अयोध्या, 1 नवंबर 2026:
Ramayana Seven Kands : अयोध्या में दीपोत्सव-2026 के दौरान रामायण के प्रसंगों को इस बार लोककलाओं के रंग में पेश किया जाएगा। संस्कृति विभाग 14 भव्य झांकियां तैयार करा रहा है, जिनमें रामायण के सातों कांडों की प्रमुख घटनाएं 3डी मॉडल के जरिए दिखाई जाएंगी। खास बात यह है कि इन झांकियों के साथ उत्तर प्रदेश के सात सांस्कृतिक अंचलों के लोकनृत्य भी शामिल होंगे। इनके अलावा देश के अलग-अलग राज्यों की नृत्य परंपराएं भी दर्शकों को देखने को मिलेंगी। साकेत महाविद्यालय से शुरू होने वाली यह सांस्कृतिक यात्रा रामकथा पार्क तक पहुंचेगी।
बालकांड से होगी झांकियों की शुरुआत
पहली झांकी में रामायण के बालकांड से जुड़े प्रसंग दिखाए जाएंगे। इसमें पुत्रेष्टि यज्ञ, विश्वामित्र के साथ राम-लक्ष्मण का जाना, अहिल्या उद्धार, सीता स्वयंवर, राम विवाह सहित पंचवटी के दृश्य शामिल होंगे। इन प्रसंगों को 3डी मॉडल के जरिए तैयार किया जाएगा। अयोध्या का फरुवाही लोकनृत्य कलाकारों की प्रस्तुति के रूप में दिखेगा। इसके साथ उत्तराखंड का छोलिया नृत्य भी आकर्षण बनेगा।
वनवास से भरत मिलाप तक की कहानी
अयोध्याकांड की झांकी में राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास जाने से जुड़े दृश्य होंगे। केवट द्वारा तीनों को गंगा पार कराना, चित्रकूट में राम-लक्ष्मण से जुड़ा प्रसंग, भरत को चरण पादुका सौंपना सहित राजसिंहासन पर पादुका स्थापित करने के दृश्य दिखाए जाएंगे। इस झांकी के साथ अवध का ढेढिया लोकनृत्य और मध्य प्रदेश का मटकी नृत्य प्रस्तुत होगा।
स्वर्ण मृग से जटायु युद्ध तक के प्रसंग
अरण्यकांड की झांकी में स्वर्ण मृग, साधु के वेश में रावण का सीता के पास पहुंचना, शबरी आश्रम में राम-लक्ष्मण का आगमन और रावण-जटायु युद्ध को दिखाया जाएगा। इसके साथ पूर्वांचल का धोबिया नृत्य और हरियाणा का घूमर नृत्य प्रस्तुत किया जाएग

हनुमान की लंका यात्रा के दिखेंगे खास दृश्य
सुंदरकांड की झांकी में समुद्र पार करने से पहले राम का समुद्र देव का आह्वान करना, सीता द्वारा हनुमान को चूड़ामणि सौंपना, मंदोदरी का रावण को समझाना, हनुमान का लंका दहन सहित राम के गुणगान के प्रसंग शामिल होंगे। सोनांचल का करमा लोकनृत्य और छत्तीसगढ़ का छाऊ नृत्य इस झांकी के साथ देखने को मिलेगा।
सुग्रीव-बालि युद्ध भी होगा आकर्षण
किष्किंधाकांड की झांकी में राम-हनुमान की पहली मुलाकात, सुग्रीव-बालि युद्ध, सुग्रीव की मदद के लिए राम का बाण चलाना, जामवंत के साथ मंत्रणा और सुग्रीव के राज्याभिषेक के दृश्य होंगे। इस दौरान बुंदेलखंड का राई नृत्य और गुजरात का गरबा-डांडिया भी प्रस्तुत किया जाएगा।
राम-रावण संग्राम से अयोध्या वापसी तक की झलक
लंकाकांड की झांकी में राम-रावण युद्ध के प्रमुख दृश्य दिखाए जाएंगे। इसमें हनुमान का संजीवनी बूटी लाना, मूर्छित लक्ष्मण को राम की गोद में दिखाना, रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना और रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना शामिल होगा। लंका विजय के बाद देवताओं की पुष्पवर्षा और पुष्पक विमान से राम, सीता और लक्ष्मण की अयोध्या वापसी भी दिखाई जाएगी। इसके साथ ब्रज का मयूर नृत्य और असम का बीहू नृत्य होगा।
रामराज्य की स्थापना के साथ खत्म होगी यात्रा
उत्तरकांड पर आधारित आखिरी झांकी में राम के राज्याभिषेक और रामराज्य की स्थापना के प्रसंग दिखाए जाएंगे। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राम दरबार की आरती का प्रतीकात्मक दृश्य, देवताओं की पुष्पवर्षा, भरत मिलाप सहित गरुड़ के कागभुशुंडि से रामकथा सुनने के प्रसंग शामिल होंगे। पश्चिमांचल का गूजरी लोकनृत्य और राजस्थान का कालबेलिया नृत्य भी इस झांकी का हिस्सा होगा।
सात अंचलों की लोकसंस्कृति को मिलेगा मंच
Jaiveer Singh : संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि झांकियों में यूपी के सात सांस्कृतिक अंचलों की पहचान को शामिल किया गया है। इनमें अयोध्या का फरुवाही, अवध का ढेढिया, पूर्वांचल का धोबिया, सोनांचल का करमा, बुंदेलखंड का राई, ब्रज का मयूर और पश्चिमांचल का गूजरी लोकनृत्य शामिल है। इनके साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात, असम और राजस्थान के लोकनृत्य भी पेश किए जाएंगे। झांकियों में अलग-अलग राज्यों की वेशभूषा, संगीत और नृत्य शैलियों को भी जगह दी जाएगी।






