UP News : मेडिकल कॉलेजों में अब तीन स्तरीय शिकायत व्यवस्था, छात्र सीधे DGME तक पहुंचा सकेंगे अपनी बात
स्टूडेंट ग्रीवांस एंड वेलफेयर इनिशिएटिव के तहत हर कॉलेज में नामित होगा नोडल अधिकारी, शिकायत पेटिका के जरिए विद्यार्थी दर्ज करा सकेंगे अपनी समस्याएं
लखनऊ, 3 नवंबर 2026:
यूपी के राजकीय और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की समस्याओं के समाधान के लिए योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। चिकित्सा शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में तीन-स्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसके तहत अब विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक, प्रशासनिक, हॉस्टल, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वे कॉलेज स्तर से लेकर महानिदेशालय, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (डीजीएमई) तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे।
महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण नेहा शर्मा की पहल पर शुरू किए गए स्टूडेंट ग्रीवांस एंड वेलफेयर इनिशिएटिव के तहत हर मेडिकल कॉलेज में स्टूडेंट वेलफेयर नोडल ऑफिसर नामित किया जाएगा। इस अधिकारी की जिम्मेदारी विद्यार्थियों की शिकायतें सुनने, उन्हें दर्ज करने और संबंधित विभागों के माध्यम से उनका निस्तारण सुनिश्चित कराने की होगी।
हर मेडिकल कॉलेज में लगेगी शिकायत पेटिका, रोज होगी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत हर मेडिकल कॉलेज के टीचिंग और एकेडमिक कैंपस में स्टूडेंट ग्रीवांस एवं वॉयस बॉक्स स्थापित किया जाएगा। विद्यार्थी अपनी समस्याएं और सुझाव लिखित रूप में इसमें डाल सकेंगे। इनमें पढ़ाई, प्रशासनिक कार्यों, हॉस्टल, आधारभूत सुविधाओं, सुरक्षा और छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे।
नामित नोडल अधिकारी प्रतिदिन शिकायत पेटिका खोलेंगे। इसमें प्राप्त शिकायतों को निर्धारित रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा और संबंधित विभागों के जरिए उनके समाधान की प्रक्रिया शुरू होगी। इससे विद्यार्थियों को अपनी बात संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने का एक आसान और व्यवस्थित माध्यम मिलेगा।
तीन स्तरों पर होगा शिकायतों का निस्तारण
शिकायतों के समाधान के लिए तीन स्तर निर्धारित किए गए हैं। पहले स्तर पर स्टूडेंट वेलफेयर नोडल ऑफिसर शिकायत पर कार्रवाई करेंगे। यहां समाधान नहीं मिलने पर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य के समक्ष अपनी समस्या रख सकेंगे।
यदि प्रधानाचार्य स्तर पर भी शिकायत का निस्तारण नहीं होता है तो विद्यार्थी तीसरे स्तर पर डीजीएमई कार्यालय के स्टूडेंट सेल में शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इस तरह कॉलेज से लेकर महानिदेशालय तक शिकायतों की सुनवाई और निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।
पारदर्शिता के साथ जवाबदेही भी होगी तय
चिकित्सा शिक्षा विभाग की इस पहल से मेडिकल कॉलेजों में छात्र कल्याण को बढ़ावा मिलने के साथ प्रशासनिक जवाबदेही भी मजबूत होगी। शिकायतों का रिकॉर्ड रखने, नियमित समीक्षा और फीडबैक की व्यवस्था से समस्याओं के समाधान में पारदर्शिता आएगी। यह कदम प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षित, सकारात्मक और छात्र-केंद्रित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






