Prayagraj News : NEET छात्रा ने खुद को गोली मारकर दी जान, कुछ घंटे पहले मिली थी MBBS में एडमिशन की खुशखबरी
NEET Student Suicide : सोनभद्र मेडिकल कॉलेज में मिली थी सीट, भाई कर रहा बीटेक, पिता रिटायर्ड इंजीनियर, सुसाइड नोट में किया OCD बीमारी का जिक्र

प्रयागराज, 3 नवंबर 2026:
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में NEET पास करने वाली 18 साल की छात्रा रितु ने खुद को पिता के लाइसेंसी असलहे से गोली मारकर जान दे दी। उसका शव कमरे में मिला। कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें OCD यानी (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) बीमारी का जिक्र किया गया है। खास बात यह है कि घटना से कुछ घंटे पहले ही रितु को MBBS की सीट आवंटित हुई थी।
कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर हुआ शक, तोड़ी गई खिड़की
मामला झूंसी थाना क्षेत्र के त्रिवेणीपुरम स्थित गंगा सेक्टर का है। रितु के पिता डॉ. देवराज शर्मा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से रिटायर्ड इंजीनियर हैं। परिवार मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला है। करीब छह साल पहले उन्होंने प्रयागराज में मकान बनवाया था। परिवार में पत्नी के अलावा जुड़वां बच्चे रितु और ऋषिराज हैं। ऋषिराज देहरादून के एक कॉलेज में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है।
रात में पढ़ाई, दिन में सोने की थी आदत, दोपहर तक कमरे से बाहर नहीं आई रितु
ACP अरुण कुमार पराशर के मुताबिक, रितु रात में पढ़ाई करती थी और सुबह सोने चली जाती थी। दोपहर करीब 2 से 3 बजे उठना उसकी दिनचर्या थी। सोमवार को काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं आने पर परिवार ने आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद खिड़की तोड़कर अंदर देखा गया तो वह मृत मिली। पास में पिस्टल भी पड़ी थी। शुरुआती पूछताछ में परिवार ने बताया कि रितु पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थी। परिजन यह नहीं बता सके कि उन्हें गोली चलने की आवाज क्यों नहीं सुनाई दी। पुलिस ने फोरेंसिक टीम को बुलाकर कमरे की जांच कराई। ACP के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत दूसरे तथ्यों के आधार पर मौत की वजह साफ होगी।
सोनभद्र मेडिकल कॉलेज में मिली थी सीट, तीसरे राउंड की काउंसिलिंग में हुआ था आवंटन
रितु ने प्रयागराज के DPS से वर्ष 2022 में हाईस्कूल और 2024 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने NEET की तैयारी शुरू की। वर्ष 2026 की परीक्षा में उसकी ऑल इंडिया रैंक 10,74,272 आई थी। सोमवार को ही तीसरे राउंड की काउंसिलिंग का रिजल्ट जारी हुआ। इसमें रितु को सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में EWS-दिव्यांग (EWPH) कोटे के तहत MBBS की सीट आवंटित हुई थी। रिजल्ट शाम करीब 4:30 बजे आया था। परिवार को शाम 7 बजे घटना की जानकारी हुई।

सुसाइड नोट में OCD का जिक्र, पिता के पास थे दो लाइसेंसी हथियार
कमरे से मिले सुसाइड नोट में OCD का उल्लेख है। रितु की आंखों में भी परेशानी थी, जिसके चलते उसका दिव्यांग प्रमाणपत्र बना था। हालांकि, सुसाइड नोट में बीमारी का जिक्र होने से ही मौत की वजह तय नहीं मानी जा सकती। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, रितु के पिता के पास .32 बोर की पिस्टल और राइफल के लाइसेंस हैं। दोनों हथियारों के लिए ऑल इंडिया लाइसेंस जारी हुआ था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि घटना में इस्तेमाल हथियार किस तरह छात्रा तक पहुंचा।
क्या है OCD, किन लक्षणों से होती है इसकी पहचान
OCD यानी ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या है। इसमें व्यक्ति के मन में बार-बार ऐसे विचार आते हैं जिन्हें वह नहीं चाहता, लेकिन कोशिश के बाद भी उनसे छुटकारा नहीं मिल पाता। इन विचारों से बेचैनी या डर बढ़ता है। इससे राहत पाने के लिए व्यक्ति कुछ काम बार-बार करने लगता है। इसे केवल साफ-सफाई की आदत समझना सही नहीं है।
जुनून और बाध्यता के रूप में सामने आती है परेशानी
OCD के लक्षण मुख्य रूप से दो हिस्सों में दिखाई देते हैं। पहले को ऑब्सेशन यानी जुनूनी विचार कहते हैं। इसमें व्यक्ति को बार-बार गंदगी या कीटाणुओं का डर सताता है। उसे ताला बंद करने, गैस बंद करने या कोई काम ठीक से हुआ है या नहीं, इस बात पर बार-बार शक हो सकता है। कुछ लोगों को चीजों को एक खास क्रम में रखने की जरूरत महसूस होती है। खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचाने से जुड़े अनचाहे विचार भी आ सकते हैं।

दूसरा हिस्सा कंपल्शन यानी बाध्यता कहलाता है। इसमें व्यक्ति अपनी बेचैनी कम करने के लिए एक ही काम बार-बार करता है। जैसे बार-बार हाथ धोना, दरवाजे का ताला जांचना, किसी खास संख्या तक गिनती करना या सामान को बार-बार एक ही तरीके से जमाना। कई बार व्यक्ति जानता है कि वह यह काम पहले कर चुका है, फिर भी उसे दोबारा करने की मजबूरी महसूस होती है।
कब गंभीर हो जाती है OCD की समस्या
जब ऐसे विचार और उन्हें रोकने के लिए किए जाने वाले काम रोजाना एक घंटे से ज्यादा समय लेने लगें, व्यक्ति को काफी परेशान करें या उसकी पढ़ाई, कामकाज और रिश्तों पर असर डालें तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में मनोचिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूरी है।
थेरेपी और दवाओं से संभव है इलाज
OCD का इलाज संभव है। इसके लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति के मुताबिक दवाएं और मनोचिकित्सा की सलाह देते हैं। इलाज के तरीकों में ERP यानी एक्सपोजर एंड रिस्पॉन्स प्रिवेंशन थेरेपी शामिल है। इसमें विशेषज्ञ की निगरानी में मरीज को अपने डर या अनचाहे विचारों का सामना करना सिखाया जाता है, साथ ही बार-बार किए जाने वाले कामों की मजबूरी को धीरे-धीरे कम करने में मदद की जाती है।






