US Midterm Elections 2026 : अमेरिकी संसद में ट्रंप के लिए बढ़ी चुनौती, मिड टर्म इलेक्शन में चमके भारतीय मूल के चेहरे
वर्जीनिया में सुहास को 61.5 फीसदी से ज्यादा वोट, फ्लोरिडा से पिया डांडिया ने दर्ज की जीत, अरुणा मिलर भी मैरीलैंड में दोबारा बनीं लेफ्टिनेंट गवर्नर, फ्लोरिडा में रिपब्लिकन का उम्मीदवार जीता

न्यूज डेस्क, 4 नवंबर 2026:
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार रह चुके सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया से एक बार फिर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीत लिया है। वहीं फ्लोरिडा के 22वें संसदीय क्षेत्र से पिया डांडिया ने जीत हासिल कर भारतीय मूल के नए चेहरे के तौर पर कांग्रेस में जगह बनाई है। मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर भी अपनी सीट बचाने में सफल रही हैं।
वर्जीनिया में सुहास की बड़ी जीत
40 वर्षीय सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें संसदीय क्षेत्र में रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराया। चुनावी नतीजों के मुताबिक, सुहास को 61.5 फीसदी से अधिक वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी के खाते में 36.4 फीसदी मत आए। सुहास इससे पहले ओबामा प्रशासन में नीतिगत सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने से जुड़े कामों में भी भूमिका निभाई थी।
फ्लोरिडा से पिया डांडिया ने बनाई जगह
भारतीय मूल की अमेरिकी उम्मीदवार पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज की है। उन्होंने पूर्व नौसैनिक केसी असकार को चुनाव में शिकस्त दी। हाईस्कूल की प्रिंसिपल रह चुकीं 39 वर्षीय पिया को 51.9 फीसदी वोट मिले। इस जीत के साथ वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के नए सदस्यों में शामिल हो गई हैं।

अरुणा मिलर ने भी बचाई अपनी सीट
मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने भी चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत रखी। 61 वर्षीय मिलर दोबारा इस पद पर काबिज होने में सफल रहीं। भारतीय मूल के उम्मीदवारों के प्रदर्शन को इस चुनाव में खास तौर पर देखा जा रहा है। उधर, ओहायो में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी गवर्नर पद की दौड़ में पीछे चल रहे हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने कई राज्यों में बढ़त बनाई
मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कई अहम मुकाबलों में जीत हासिल की है। नॉर्थ कैरोलिना में पार्टी ने सीनेट की एक सीट रिपब्लिकन पार्टी से छीन ली। जॉर्जिया में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने अहम जीत दर्ज की। पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने नॉर्थ कैरोलिना में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल वाटली को हराया। वहीं मिसौरी के पहले संसदीय क्षेत्र से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार वेस्ली बेल ने भी दोबारा जीत दर्ज की।
ट्रंप सरकार के कामकाज पर उठे सवाल
सीएनएन के शुरुआती सर्वेक्षण में मतदाताओं के बीच देश की मौजूदा स्थिति, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कामकाज को लेकर नाराजगी के संकेत मिले। मतदान के दिन ट्रंप व्हाइट हाउस में अपने सलाहकारों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई संदेश साझा कर रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया।

ट्रंप बोले, चुनाव में उतरता तो बड़ी जीत मिलती
चुनावी नतीजों के बीच ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अगर वह खुद चुनाव मैदान में होते तो रिपब्लिकन पार्टी को बड़ी जीत मिलती। उन्होंने लिखा कि वह इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे, वरना नतीजे अलग होते। बाद में द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह चुनावी नतीजों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। अपने ताजे पोस्ट में ट्रंप ने कहा रिपब्लिकन एशले मूडी ने डेमोक्रेट एंजी निक्सो को हराकर फ्लोरिडा अमेरिकी सीनेट का विशेष चुनाव जीत लिया है। मूडी की जीत सबसे संभावित परिणाम थी, क्योंकि पिछले एक दशक से इस राज्य का झुकाव लगातार रिपब्लिकन पार्टी की ओर रहा है
प्रतिनिधि सभा में बहुमत की लड़ाई अहम
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफरीस ने चुनाव प्रचार में जुटे कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी दोबारा निचले सदन में बहुमत हासिल करने की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी ऐसी संसद देना चाहती है जो अमेरिकी नागरिकों के हितों को प्राथमिकता दे।
Republican Ashley Moody has won the Florida U.S. Senate special election, defeating Democrat Angie Nixo.
Moody’s win was always the most likely outcome in a state that has trended steadily Republican over the past decade.
— Donald J Trump Posts TruthSocial (@TruthTrumpPost) November 4, 2026
अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल करती है तो ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर संसदीय निगरानी बढ़ सकती है। इससे राष्ट्रपति के नीतिगत एजेंडे पर भी असर पड़ने की संभावना रहेगी। हालांकि राष्ट्रपति के पास कार्यकारी आदेशों के जरिए फैसले लेने का अधिकार बना रहेगा।






