Uttarakhand

सोंग नदी की सेहत का पता लगाएंगे बायो इंडिकेटर्स, SARRA ने शुरू किया शोध

80 किलोमीटर के दायरे में 36 स्थानों पर होगा सर्वे, पांच प्रमुख जीव समूहों के अध्ययन से तैयार होगा नदी की पारिस्थितिकी का आधारभूत डाटा, मौजूदा स्थिति का वैज्ञानिक आधार पर होगा मूल्यांकन

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 4 नवंबर 2026:

उत्तराखंड की पूर्वी दून घाटी की जीवनरेखा सोंग नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का आकलन अब जैविक संकेतकों (बायो इंडिकेटर्स) के माध्यम से किया जाएगा। नदी की जल गुणवत्ता, तटीय आवास और मानवीय गतिविधियों से पड़ने वाले प्रभावों को समझने के उद्देश्य से स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) ने नदी क्षेत्र में बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस अध्ययन के माध्यम से नदी की मौजूदा स्थिति का वैज्ञानिक आधार पर मूल्यांकन कर उसके संरक्षण व पुनर्जीवन के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी।
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भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक डॉ. वीपी उनियाल के मार्गदर्शन में यह अध्ययन पूरा किया जाएगा। परियोजना के तहत नदी व उसके आसपास पाए जाने वाले जीव-जंतुओं की विविधता और उनकी मौजूदगी के आधार पर पारिस्थितिकी की स्थिति का आकलन होगा।

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पांच जीव समूहों से परखी जाएगी नदी की सेहत

अध्ययन में पांच प्रमुख जैविक समूहों को शामिल किया गया है। इनमें जलीय मैक्रोइनवर्टेब्रेट्स यानी पानी में पाए जाने वाले छोटे अकशेरुकी जीव और उनके लार्वा शामिल हैं, जो जल प्रदूषण के प्रति संवेदनशील होते हैं। इनके अलावा तितलियों व जंगली मधुमक्खियों के जरिए नदी तट की हरियाली एवं परागण की स्थिति का पता लगाया जाएगा। वहीं, ड्रैगनफ्लाई व डेम्सलफ्लाई (ओडोनाटा) की प्रजातियां जल की स्वच्छता और नदी किनारे के पर्यावास की स्थिति का संकेत देंगी। पक्षियों की प्रजातियों का अध्ययन कर पूरे नदी गलियारे (रिवराइन कॉरिडोर) के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का आकलन किया जाएगा।

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अध्ययन के लिए नदी को तीन हिस्सों में बांटा

परियोजना के तहत सोंग नदी के उद्गम स्थल कद्दूखाल (टिहरी) से लेकर गंगा में संगम स्थल तेहरी फार्म (देहरादून) तक करीब 80 किलोमीटर क्षेत्र में सर्वेक्षण किया जाएगा। अध्ययन की सुविधा के लिए नदी को ऊपरी, मध्य और निचले तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक हिस्से में 12-12 स्थायी सैंपलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इस तरह कुल 36 स्थानों पर नियमित अध्ययन किया जाएगा।
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मानसून के बाद और पहले होगा सर्वेक्षण

करीब छह माह की इस परियोजना में नवंबर से अप्रैल के बीच दो चरणों में फील्ड सर्वे किया जाएगा। इसमें मानसून के बाद और मानसून से पहले की स्थितियों का अध्ययन शामिल होगा। दोनों मौसमों में प्राप्त आंकड़ों की तुलना से नदी की पारिस्थितिकी में होने वाले मौसमी बदलावों और पर्यावरणीय दबावों को समझने में मदद मिलेगी।

सोंग बांध व शहरीकरण के प्रभावों का होगा आकलन

इस अध्ययन से सोंग नदी का व्यापक आधारभूत डाटाबेस (बेसलाइन) तैयार होगा। इसके आधार पर प्रस्तावित सोंग बांध, खनन गतिविधियों और तेजी से बढ़ते शहरीकरण का नदी की पारिस्थितिकी पर पड़ने वाला प्रभाव समझने में मदद मिलेगी। साथ ही नदी के संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर उनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित नीतियां और कार्ययोजनाएं तैयार की जा सकेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार जैविक संकेतकों के माध्यम से नदी की सेहत का आकलन केवल पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे नदी के आसपास के प्राकृतिक आवास व संपूर्ण जैव विविधता की स्थिति भी सामने आएगी।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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